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बड़ौत में रालोद को फिर ले डूबी अंर्तकलह

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बागपत। निकाय चुनाव में अपने ही गढ़ में रालोद को जोर का झटका लगा है। बड़ौत सीट पर वापसी की उम्मीदों को भाजपा ने तोड़ दिया। सपा, बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। टिकट को लेकर रालोदियों के बीच छिड़ी अंतर्कलह हार की वजहों में से एक है।
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रालोद के प्रत्याशी अश्वनी तोमर को अपने गढ़ में ही निराशा मिली। रालोद का गढ़ माने जाने वाले आवास विकास कॉलोनी, मधुबन, देव नगर, सूर्य नगर, सुभाष नगर, पट्टी चौधरान अपेक्षा के अनुसार वोट नहीं मिल सके। रालोद की हार की यह भी एक बड़ी वजह है। इसके अलावा टिकट को लेकर मची मारी भी हार का एक कारण रही। टिकट नहीं मिलने से नाराज सलीम ने रालोद छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया। अधिकतर मुस्लिम वोट रालोद से छिटककर सलीम के साथ चले गए। बसपा और रालोद में हुए मतों के बंटवारे का फायदा भाजपा को हुआ। ऐसा पहला मौका नहीं है जब रालोद को अंतर्कलह के कारण हार का सामना करना पड़ा हो। विधानसभा चुनाव 2012 में भी अश्वनी तोमर बसपा के लोकेश दीक्षित से मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे। लोकसभा चुनाव से पहले रालोद की हार से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सपा, बसपा और कांग्रेसियों की जमानत जब्त
बागपत। अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा सके। बागपत में पूर्व विधायक चंद्रे की पुत्रवधू बबली देवी ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 650 वोट ही मिली। कांग्रेस के वकील अहमद को 704, बसपा के राजेंद्र प्रसाद को 674 वोट मिले और जमानत जब्त हुई। खेकड़ा में बसपा के रिहाना को सिर्फ 45 वोट मिले। बड़ौत में सपा के नूर मोहम्मद को 426, आम आदमी पार्टी के सतीश को 71, कांग्रेस के मुकेश को 687 वोट मिले। बसपा के सलीम ने बड़ौत में 13675 वोट हासिल कर जमानत बचाने में कामयाबी हासिल की। टटीरी में सपा के तेजपाल सिंह को 388, बसपा के जितेंद्र को 78, अमीनगर सराय में सपा के खगेश को चार, कांग्रेस के अख्तर को 21, बसपा के राजीव को 92 वोट मिले।
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