बागपत। काठा गांव में मातम पसरा है। हर तरफ केवल रोने की आवाजें आ रही हैं। हर किसी की आंखों में आंसू हैं। पूरे गांव में किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले। बुजुर्ग बताते हैं गांव में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है। शवों का यमुना नदी के किनारे अंतिम संस्कार कर दिया।
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बसे काठा गांव के लिए बृहस्पतिवार का दिन दुखों का सैलाब लेकर आया। सुबह यमुना में नाव डूबी। 19 मौतों से पूरा गांव सदमे में है। सांत्वना देने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। किसी का भाई चला गया, किसी का बेटा। पोस्टमार्टम के बाद लाशें गांव में पहुंचनी शुरू हुईं तो चीख-पुकार मच गई। हर किसी की आंखों में आंसू हैं । श्मशान में चिताएं जलीं तो कब्रिस्तान में सुपुृर्द-ए-खाक किया गया। गांव में हर तरफ केे वल रोने की आवाजें आ रही हैं। चूल्हे ठंडे पड़े हैं। लोग एक दूसरे के गम में शरीक हुए। बुजुर्ग हरपाल सिंह की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह बताते हैं कि कभी ऐसी आपदा गांव ने नहीं देखी। रामकिशन कहते हैं कि ऐसा मंजर न कभी देखा और न ही सुना है। इमामुद्दीन कहते हैं कि किसी ने ऐसा सोचा भी नहीं था। सालों तक अब यह दर्द हमें सालता रहेगा।