बागपत। सरूरपुर कलां गांव में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान में 43वें दिन श्री जी का अभिषेक और शांति धारा की गई। महा मंडल विधान में शांति नाथ भगवान की पूजा अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालुओं को धर्म उपदेश दिए।
विधान निदेशक नमन जैन ने कहा कि बोलने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वे बोलने से पहले अपने वचनों को तौल लें। यदि बोलने से पुण्य कम पाप ज्यादा पैदा होता है तो न बोलना ही उचित है, किंतु बोलने से दुख कम सुख ज्यादा हो तो वहां बोलना ही उपयोगी है। ऐसा बोलो जो स्वयं पर हित के लिए लाभदायक और शांति प्रदान करने वाला हो, वही वचन सार्थक है, जो हितकर हो, सीमित हो, इसके विपरीत अहितकर वचन कभी नहीं बोलना चाहिए। विधान नितिन जैन कांधला वाले और विकास जैन, रुचि जैन दिल्ली वालों की ओर से हुआ। इसमें लक्ष्य, वैशाली, पूर्ति, मेघा, प्रज्ञा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, मंजू, अनीता, सपना, जूली, ऊषा सुव्रत अदिति, हंस कुमार जैन आदि रहे।