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चार साल से नहीं हुआ मनरेगा मजदूरों का भुगतान

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बागपत। मनरेगा योजना के अंतर्गत मजदूरों को चार साल से भुगतान लंबित है। छह ब्लॉक, वन, सिंचाई, भूमि संरक्षण, लोक निर्माण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग पर भुगतान लंबित है। सीडीओ पीसी जायसवाल ने समीक्षा की तो यह मामला पकड़ में आया। इन विभागों अधिकारियों को नोटिस जारी कर जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए।
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मनरेगा में पहले ही मजदूरों का टोटा है। जो काम करते है, उन्हें समय पर भुगतान नहीं होता। मजदूरी न देने पर भी भत्ता पाने के लिए दफ्तरों के मजदूर चक्कर काटते है और ऑनलाइन शिकायत भी करते है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। सीडीओ पीसी जायसवाल ने मनरेगा लंबित भुगतान की समीक्षा की तो चार वर्षों से विभागों पर मजदूरों का लंबित भुगतान लंबित मिला। जिस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लंबित भुगतान पर विभाग के अफसरों का कोई ध्यान नहीं है। जबकि पूर्व में कई बार निर्देशित किया जाता रहा है। लगातार अनुश्रवण किया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यह स्थिति अत्यंत ही खेदजनक है। सीडीओ ने सभी बीडीओ, सिंचाई विभाग, वन, भूमि संरक्षण, लोक निर्माण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों को 15 दिनों में लंबित भुगतान करने के निर्देशित किया। यह भी निर्देश दिए कि भुगतान करने में कोई तकनीकी समस्या आती है तो अभिकरण कार्यालय में संपर्क कर समाधान कराना सुनिश्चित करेंगे।

2014 से 2018 तक विभागों पर लंबित भुगतान
बागपत। बागपत ब्लॉक में वर्ष 2014-15 में आठ हजार, 2015-16 में छह हजार, 2016-17 में दो हजार, 2017-18 में नौ हजार, बड़ौत वर्ष 2014-15 में 39 हजार, 2015-16 में 15 हजार, 2016-17 में पांच हजार, 2017-18 में 15 हजार, बिनौली वर्ष 2014-15 में 4.38 लाख, 2015-16 में 1.29 लाख, 2016-17 में 1.47 लाख, 2017-18 में 15 हजार, छपरौली में वर्ष 2014-15 में 28 हजार, 2015-16 में पांच हजार, 2016-17 में एक हजार, 2017-18 में आठ हजार, खेकड़ा में वर्ष 2014-15 में 1.16 लाख, 2015-16 में नौ हजार, 2016-17 में सात हजार, 2017-18 में सात हजार, पिलाना में वर्ष 2014-15 4.06 लाख, 2015-16 में 48 हजार, 2016-17 17 हजार, 2017-18 में 24 हजार, सिंचाई विभाग पर 2014-15 में 39 हजार, 201516 में 28 हजार, 2016-17 में 24 हजार, 2017-18 में 55 हजार, वन विभाग पर वर्ष 2014-15 में 1.25 लाख, 2015-16 में 1.11 लाख, 2016-17 में 15 हजार, 2017-18 में 13 हजार, भूमि संरक्षण विभाग पर वर्ष 2014-15 में 2.06 लाख, 2015-16 में 11 हजार, 2016-17 में 34 हजार, 2017-18 में 13 हजार, लोक निर्माण विभाग (निर्माण खंड) वर्ष 2014-15 में 17 हजार, 2015-16 में 32 हजार, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग वर्ष 2016-17 में तीन हजार, 2017-18 में तीन हजार रुपये बकाया है।
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