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आठ साल से हाईवे पर चल रही सियासत, खुद आएंगे गड़करी और योगी-Meerut

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बागपत। उत्तर प्रदेश के चार जिलों से गुजरने वाले दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर पिछले आठ साल से सियासत चल रही है। साल 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में मुद्दा खूब गूंजा। यही नहीं साल 2014 के लोकसभा चुनाव में हर मंच पर हाईवे का निर्माण रहा। अगले साल के लोकसभा चुनाव के लिए अभी से हाईवे की सियासत गरमाने लगी है। यही वजह है कि केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडक़री और सीएम योगी आदित्यनाथ खुद बागपत आ रहे हैं।
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गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर के भले ही राजनीतिक समीकरण अलग-अलग हों, लेकिन हाईवे ने इन चार जिलों की राजनीति को गड्ढ़ों का मुद्दा दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश की राजधानी से जोडने के लिए भी यही महत्वपूर्ण मार्ग है। एक अ़गस्त 2011 को हाईवे निर्माण के लिए एग्रीमेंट जरूर हुआ, लेकिन अब तक हाईवे नहीं बना। बल्कि यह राजनीतिक मुद्दा बन गया। हालात यह रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने पहुंचे, तब भी दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का मुद्दा ही उठा था। लोनी और शामली में लगने वाले जाम से लोग आजिज हैं। हाईवे के नए निर्माण में शामली में बाईपास का प्रावधान किया गया है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सियासत का दांव चलने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और सीएम योगी आदित्यनाथ खुद आ रहे हैं।
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