आठ घोड़ों को ग्लैंडर्स की पुष्टि, दी जाएगी मौत
बागपत। घोड़ों और खच्चरों में होने वाली जानलेवा ग्लैंडर्स बीमारी का जिले में प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक घोड़े को पहले ही मौत का इंजेक्शन दिया जा चुका है। अब री-सैंपलिंग में आठ घोड़ों को ग्लैंडर्स की पुष्टि हो गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजपाल सिंह ने बताया कि नियमानुसार इन घोड़ों को भी जहर का इंजेक्शन लगाया जाएगा।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि बागपत के ईंट भट्ठे पर सबसे पहले तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स के लक्षण दिखाई दिए थे। इसके बाद छह अन्य घोड़ों के सैंपलों की जांच कराई गई। कुल नौ घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हो गई थी। एक घोड़े को मौत का इंजेक्शन दे दिया गया था, लेकिन आठ घोड़ों के मालिकों ने दोबारा से जांच कराने की मंाग रखी थी। हिसार स्थित लैब में दोबारा जांच कराई तो आठ घोड़ों को बीमारी की पुष्टि हो गई है। जिसके चलते अब इन घोड़ों को शनिवार को जहर का इंजेक्शन दिया जाएगा। मौत के बाद इन्हें मिट्टी में दफना दिया जाएगा। यह प्रक्रिया कानूनी है ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। विभाग ने इस बीमारी पर 2009 में एक्ट बनाया था, जिसमें ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़ों को जहर का इंजेक्शन लगाए जाने का प्रावधान है।
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कंट्रोल एरिया घोषित हो चुका बागपत
डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने बागपत को कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया था। ग्लैंडर्स घोड़ों की जानलेवा बीमारी है और एक पशु से दूसरे पशु में बेहद तेजी के साथ फैलती है। हाईअलर्ट के बाद घोड़ों के जिले से आवागमन पर रोक लगा दी गई है। ईंट भट्ठों पर अभियान चलाकर घोड़ों के सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी।
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इसलिए बीमारी फैलने का खतरा
ग्लैंडर्स घोड़ों और खच्चरों में पाई जाने वाली बीमारी है। जनपद में 450 से अधिक ईंट भट्ठे हैं। मजदूरी के लिए यहां पर आसपास के जिलों से भी घोड़ों और खच्चरों को लाया जाता है। इस कारण यहां बीमारी फैलने का अधिक खतरा है।
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क्या है बीमारी के लक्षण
सीवीओ डा. राजपाल सिंह बताते हैं कि घोड़ों, गधों या खच्चरों में यह बीमारी फैलती है। नाक से पतले पानी की तरह स्राव निकलने लगता है। नाक और श्वास नली की श्लेष्मा झिल्ली में अल्सर हो जाते हैं। त्वचा प्रभावित होती है। पशु की ग्रंथिकाओं का बढ़ाव या सूजना शुरू हो जाता है।
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