बागपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना नदी में मशीनरी से होने वाल खनन पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। प्रकरण की अगली सुनवाई 24 मई को होगी। उधर, आदेश के बावजूद जिले में मशीनरी से खनन किया जाता रहा। खनन विभाग का कहना है कि अभी तक उनके पास इस तरह का आदेश नहीं पहुंचा है।
जस्टिस आरएस राठौर और न्यायिक सदस्य सत्यवान सिंह की कमेटी ने चार मई को यह आदेश पारित किए हैं। तीन मई को कोर्ट कमिश्नर डा. अभिषेक आत्रेय ने हरियाणा के सोनीपत और यमुनानगर में कई साइट का निरीक्षण किया था। फोटोग्राफ के साथ अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसके बाद यह फैसला दिया गया। एनजीटी ने हरियाणा के अलावा यूपी सरकार को भी आदेश की प्रति भेजी है। यमुना नदी में गलत तरीके से खनन की शिकायत के बाद एनजीटी ने कमिश्नर को मौके पर भेजकर पूरे मामले की जांच कराई और इसके बाद आदेश दिए। कमिश्नर को मौके पर कई जगह जेसीबी, पॉकलेन से खनन होता मिला, जबकि पॉकलेन से खनन नहीं किया जा सकता है। खनन साइट के पास ही स्टॉक लगाए जा रहे हैं, जहां मशीनरी का प्रयोग किया जा रहा है। मशीनरी के प्रयोग से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उधर, एनजीटी के आदेश के बावजूद मशीनरी से खनन किया जा रहा है।
रात के समय खनन तो होगी कार्रवाई
बागपत। रात के समय पर खनन नहीं किए जाने का प्रावधान है, लेकिन कई जगह ग्रामीणों ने कहा कि रात के समय खनन किया जा रहा है। जिस पर एनजीटी ने गंभीरता दिखाते हुए कहा है कि खनन करने वालों पर सख्ती की जाएगी। जिला खनन अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि अगर रात के समय खनन किया गया तो कार्रवाई होगी।
यमुना में बन गए हैं मौत के कुंड
बागपत। खनन से यमुना नदी में कई जगह मौत के कुंड बन गए हैं। काठा में नाव हादसा हो चुका है, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई थी। खनन से कई जगह 25-25 फीट गहरे गड्ढ़े बन गए हैं, जो बरसात के दिनों में जानलेवा साबित हो सकते हैं।
बागपत के कई लोगों ने दाखिल की याचिका
बागपत। खनन अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने स्वीकार किया कि बागपत के कई लोगों ने एनजीटी में खनन के विरोध में याचिका दाखिल की है। जल्द ही इन पर फैसला आने वाला है। याचिकाओं में अलग-अलग वजह बताई गई है।
------------------------