बागपत। आमिर खान की फिल्म दंगल का डायलॉग तो आपको याद ही होगा। म्हारी छोरियां छोरों से कम है कै.... बागपत की बेटियों ने यही चरितार्थ कर दिखाया है। खेल जगत के अलावा नौकरी और अब शिक्षा के क्षेत्र में नया मुकाम जिले की बेटियों ने बनाना शुरू कर दिया है।
बेटियों ने बागपत की पहचान बदलनी शुरू कर दी है। खेल के मैदान से लेकर अब शिक्षा के क्षेत्र में बागपत की बेटियों ने बादशाहत कायम कर दी है। पहले यूपी पुलिस के नतीजों में सरूरपुर कलां की प्रिंसी नैन ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था और अब यूपी बोर्ड के रिजल्ट में तनु तोमर ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। बागपत की शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर ने नई पहचान दी है। दोनों की बायोपिक बनाने के लिए अनुराग कश्यप और प्रकाश झा जैसे निर्माता निर्देशक जौहड़ी गांव पहुंच गए थे। तीरंदाज रितिका वेदवान को इसी साल रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड दिया गया। वेदवान ने सूबे में बागपत का नाम रोशन किया। मधु वेदवान ने कई पदक जीते। बागपत की बहू कविता दलाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाया। यूपी पुलिस के रिजल्ट में सरूरपुर कलां की प्रिंसी नैन ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि माल माजरा गांव की पलकी सोलंकी ने सूबे में तीसरा स्थान हासिल किया।