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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर दौड़ा विकास का पहिया

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बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (ईपीई) के निर्माण से दिल्ली में वाहनों का बोझ घट गया। एक्सप्रेस-वे के निर्माण, भूमि अधिग्रहण, उद्घाटन और फर्राटा भरते वाहनों समेत ईपीई की जानकारी अमर उजाला ने लोगों तक पहुंचाई। लाइटिंग शो देखने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लोग बागपत में जमा हुए, जिनकी खुशियों को सबसे पहले अमर उजाला ने ही साझा किया। एक्सप्रेस-वे के निर्माण से पश्चिम यूपी, हरियाणा और दिल्ली को सबसे अधिक लाभ होगा। निर्माण के ाबद अब कई राज्यों के वाहनों को दिल्ली में एंट्री की जरूरत ही नहीं रह गई है और दिल्ली पर वाहनों का बोझ घट गया है। दिल्ली पर वाहनों का बोझ कम करने के लिए बनाए गए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पूरी तरह एक्सिस कंट्रोल रहेगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जाने के लिए अब लोगों को दिल्ली में एंट्री करने की जरूरत नहीं रहेगी। वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के साथ मिलकर यह दिल्ली के चारों तरफ रिंग रोड बन जाएगा। कई खास बातें, इसे देश का सबसे अलग एक्सप्रेस-वे साबित करती हैं। निर्माण में 4617.87 करोड़ रुपये खर्च हुए। कुल 9375 मजदूरों ने इस पर कार्य किया। अकेले बागपत की बात करें तो 2221 किसानों की जमीन का अधिग्रहण इसके निर्माण में किया गया।
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बागपत से ऐसे गुजरता है एक्सप्रेस-वे
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का बागपत में करीब 20.125 किमी का टुकड़ा है। काठा, मवी कलां, खेकड़ा, रावण उर्फ बड़ा गांव, नंगला बहेड़ी, लहचौड़ा, गौना, सिंगौली तगा, शरफाबाद, आलम गिरपुर उर्फ टुकाली एवं फुलैरा गांव से होकर एक्सप्रेस-वे गुजरेगा। मवी कलां में इंटर चेंज बनाया, इससे बागपत ही नहीं शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और गाजियाबाद के लोगों को लाभ होगा। गढ़-सोनीपत हाईवे पर वाहनों का बोझ एक्सप्रेस-वे के शुरू हो जाने के बाद कम हो गया है।
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