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सात साल बाद अभियुक्त ने कबूल किया जुर्म

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बागपत। बड़ौली गांव में सात साल पहले पूर्वी यमुना नहर पुल के पास पुलिस टीम पर फायरिंग के मामले में जिला जेल में बंद आरोपी अजय उर्फ मोटा ने एडीजे तृतीय डॉ. मनु कालिया की कोर्ट में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसे जेल में बिताई गई अवधि की सजा एवं छह सौ रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
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एडीजीसी राजीव कुमार ने बताया कि 17 जुलाई 2011 की रात्रि पूर्वी यमुना नहर पर बड़ौत कोतवाली के तत्कालीन उपनिरीक्षक कर्म सिंह पुंडीर फोर्स के साथ गश्त कर रहे थे। बड़ौली नहर पुल के पर दो लोग खड़े दिखाई दिए। पुलिस को शक होने पर टार्च की रोशनी डालते हुए उन्हें टोका तो दोनों व्यक्तियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिसकर्मियों ने घेरकर एक बदमाश को पकड़ लिया जबकि दूसरा अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में कामयाब हो गया। पकड़े गए व्यक्ति ने अपन नाम अजय उर्फ मोटा निवासी शिकोहपुर बताया। तलाशी लेने पर उसके पास से 315 बोर का तमंचा व कारतूस बरामद हुए थे। इस मामले में धारा 307 आईपीसी एवं 25 आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ। यह मुकदमा एडीजे तृतीय डॉ. मनु कालिया की कोर्ट में विचाराधीन था। शुक्रवार को जिला कारागार में बंद अभियुक्त अजय उर्फ मोटा ने कोर्ट में अपना जुर्म कबूल कर लिया और लिखित में दिया कि वह अपना जुर्म इकबाल करता है। उसे कम से कम अर्थदंड से दंडित किया जाए। उसे धारा 307 में जेल में बिताई गई अवधि की सजा एवं पांच सौ रुपये व 25 आर्म्स एक्ट में जेल में बिताई गई अवधि की सजा एवं 100 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
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