बागपत/चांदीनगर। पांची गांव स्थित एमजीएस अल अमन स्कूल में जलियांवाला बाग कांड की 100वीं बरसीं पर शहीदों को याद किया गया। प्रधानाचार्य गुलिस्तां मुमताज ने कहा कि शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 13 अप्रैल 1919 ई. को जलियांवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर निहत्थे और निर्दोष हिंदुस्तानियों पर गोलियां चलवा दी थी, जिसमें सैकड़ों लोग शहीद हो गए थे। भारतीय इतिहास का यह काला दिन है, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है। उप प्रधानाचार्य गुलजार अहमद ने भी संबोधित किया। दीपक, इरफान, कुलदीप, गुलजार आलम, समीर, सत्तार अहमद, गरिमा ढाका मौजूद रहे।
रालोद कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने जलियांवाला बाग कांड की 100वीं बरसी मनाई। शहीदों को श्रद्धाजंलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि 13 अप्रैल को जब पूरा पंजाब बैसाखी का त्योहार मना रहा था तो अंग्रेज सेना के एक अधिकारी जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने निहत्थे लोगों को चारों तरफ से घेरकर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया था। इससे आजादी की ज्वाला भड़क गई थी। जिसके बाद महान क्रांतिकारी पं. चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव, अशफाक उल्लां खां जैसे वीर पैदा हो गए थे। 13 मार्च 1940 को उधम सिंह ने लंदन में जाकर जनरल डायर की हत्या कर जलियांवाला बाग के कांड का बदला लिया था। हत्याकांड के 28 वर्ष बात देश आजाद हुआ। कंवरपाल हुड्डा, वीरेंद्र, विक्रम पांचाल, कलीम, शौकत, अनिरूद्ध, इंद्रपाल, चश्मवीर, रविंद्र काठा मौजूद रहे।