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कैसी चकबंदी, आपस में ही उलझा दिए किसान?

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दोघट (बागपत)। बामनौली में चकबंदी अधिकारियों ने किसानों की आपस में ही मुकदमेबाजी शुरू करा दी है। चकबंदी तो आधी-अधूरी है, लेकिन खेतों के बंटवारे और कब्जा परिवर्तन को लेकर किसान कई बार आपस में उलझ चुके हैं। झगड़े भी हुए हैं, दो दिन पहले खुद डीएम को पुलिस चौकी पर पहुंचकर मामले की सुनवाई करनी पड़ी। किसानों ने कहा दोबारा चकबंदी अधिकारी से ही इंसाफ मिल सकेगा।
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बामनौली गांव के लिए चकबंदी नासूर बन गई है। 37 साल से किसान अधिकारियों के दफ्तरों में एड़ी रगड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक इंसाफ नहीं मिला। चकबंदी अधिकारियों ने सैकड़ों किसानों के हवाई चक काट दिए। इस कारण सैकड़ों किसान चकों के लिए कोर्ट में मुकदमे लड़ रहे हैं। कब्जा परिवर्तन के चलते किसानों के बीच आपस में ही रंजिश शुरू हो गई है। किसान महक सिंह का कहना है कि अनियमित कार्य के लिए चक सृजन करने वाले सहायक चकबंदी अधिकारी और चक आपत्ति एवं अपील सुनने वाले चकबंदी प्राधिकारी दोषी है। इसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
किसान प्रेमपाल ने कहा गांव में सहायक चकबंदी अधिकारी स्तर पर चक सृजन की कार्रवाई एवं धारा 20 का प्रकाशन अत्यंत हड़बड़ी में और किसानों से बिना परामर्श किए हुए किया। इस कारण किसानों की समस्याएं और भी विकराल हो गई है।
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किसान कृष्णपाल ने कहा तत्कालीन चकबंदी अधिकारियों द्वारा प्रदूषित कार्रवाई पर ही कार्रवाई की जाती रही है। चकबंदी को नए सिरे से कराया जाए।
किसान ज्ञानेंद्र ने कहा चकबंदी विभाग के पास गांव का रिकार्ड ही नहीं है। कौन सी जमीन कहां है, किसकी जमीन पर कितने पेड़ खड़े है। फाइलों में कब्जा परिवर्तन किया गया है।


आत्महत्या के अलावा नहीं कोई रास्ता
मास्टर खिलारी सिंह, राजीव व मास्टर महेंद्र सिंह का कहना है कि चकबंदी ने सैकड़ों परिवार को बर्बाद कर दिया है। किसान अपनी ही जमीन के लिए मारा-मारा फिर रहा है, लेकिन उसे जमीन नहीं मिल रही है। खामियों को दूर किए बिना ही चक काटे गए हैं। अब किसानों के सामने आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचा है। किसान चकबंदी विभाग के अधिकारियों को रिश्वत देते-देते खुद कर्ज बंद हो गए हैं। किसानों ने अधिकारियों की जेब गर्म करने के लिए अपने पशुओं तक को बेच दिया। फिर भी उन्हें आज तक इंसाफ नहीं मिला है। उन्हें इंसाफ चाहिए।

अंधा सिस्टम, इस तरह आपस में उलझे हैं किसान
दोघट। बामनौली गांव के किसान गुलवीर चौधरी ने बताया कि चार दिन पहले दो सगे भाई कृष्णपाल और सुक्रमपाल प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए टॉवर पर चढ़े थे। उनसे कानून के दायरे में रहकर जमीन की पैमाइश कराई । जिस जमीन को दोनों भाई अपनी बता रहे हैं, उस पर किसान गुलवीर का 25 साल तक कब्जा रहा है। वह जमीन उनकी मूल जोत की है। इसके लिए वह 2017 से कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा है। कोर्ट में मुकदमा जीतने के बाद ही एसओसी को जमीन की पैमाइश कराने के आदेश मिले हैं। दोनों भाइयों को पहले नोटिस दिया था। इसके बाद भी वे पैमाइश कराने नहीं आए। पिछले दो माह से दोनों भाई दो बार पैमाइश पर स्टे भी ला चुके हैं। अब उनके स्टे की तिथि भी समाप्त हो गई । उसने किसानों की आठ बीघा फसल नहीं उजाड़ी। चकबंदी ने उन्हें कंगाल कर दिया है। जमीन के लिए दोनों भाई उसकी जान के दुश्मन बने हैं। कोई भी अधिकारी उसकी सुनने को तैयार नहीं है। अधिकारी उसका उत्पीड़न कर रहे है। यदि टॉवर पर चढ़ने से समस्या का समाधान होता है तो वह भी अपने परिवार के साथ टॉवर पर चढ़ जाएगा। अधिकारियों को दोनों पक्षों को बैठाकर समस्या का समाधान कराना चाहिए।


रिश्वत मांगने पर पेशकार हो चुका है निलंबित
दोघट। बामनौली गांव में चल रही चकबंदी में किसानों से रिश्वत लेने वाले कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी, लेकिन इसके बाद भी किसी में कोई सुधार नहीं है। किसान गुलवीर सिंह से चकबंदी के मामले में पारित एक आदेश में स्टे दिलाने और चक ठीक कराने के नाम पर उप संचालक चकबंदी के पेशकार अक्षय केा छह लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में दोषी मिलने पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने पेशकार अक्षय को निलंबित किया था।
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