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सात घंटे सर्जरी के बाद शिशु को मिला जीवनदान, टेंडर पॉम अस्पताल में डॉक्टर्स ने किया करिश्मा

सार

डॉ. विजय अग्रवाल ने बताया कि आम इंसान से उल्टा इस स्थिति में हृदय के दाएं हिस्से से आरोटा और बाएं हिस्से से पल्मोनरी धमनी मिली।
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Doctors Team - फोटो : Social Media
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में संभवतः यह पहली घटना होगी, जब एक युवा दंपति को समय से पहले जन्मे दो किलोग्राम के बच्चे में टीजीए (धमनियों का स्थानांतरण) बीमारी का पता चला और उसे समुचित इलाज देकर जीवनदान दिया गया। इस मामले में शिशु को बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा जीवन रक्षक दवा प्रोस्टाग्लैंडीन दी गई और टेंडर पाम अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय अग्रवाल की देखरेख में भेजा गया।

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डॉ. विजय अग्रवाल और उनकी टीम ने शिशु की 7 घंटे लंबी और जटिल सर्जरी की। इलाज की गंभीरता यह रही कि शिशु की छाती 24 घंटे तक खुली रखनी पड़ी। अंततः आईसीयू स्टाफ और बाल रोग विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत से 3 दिनों के बाद शिशु को सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया और उसे एक नया जीवन मिला।

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डॉ. विजय अग्रवाल ने बताया कि आम इंसान से उल्टा इस स्थिति में हृदय के दाएं हिस्से से आरोटा और बाएं हिस्से से पल्मोनरी धमनी मिली। उन्होंने बताया कि बच्चे की कोरोनरी धमनी को संभालना मुश्किल था और इंट्राम्यूरल सर्जरी की कठिनाई बढ़ रही थी और इस वजह से बच्चे की जान बचाना असंभव जैसा हो गया था, लेकिन जटिल सर्जरी के जरिए इस नामुमकिन से ऑपरेशन में सफलता अर्जित की गई।

इस बारे में टेंडर पाम अस्पताल के सीईओ विनय शर्मा ने कहा, यह टीम वर्क और विशेषज्ञ आईसीयू टीम की मेहनत से संभव हुआ है। ऐसी विशेषज्ञता से लोगों के चेहरे पर मुस्कान आती है और यही हमारे लिए महत्वपूर्ण है। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विनीत शुक्ला ने कहा कि वर्तमान में टेंडर पॉम एकमात्र ऐसा अस्पताल है, जो शिशुओं को ऐसी गंभीर स्थिति से निकालकर जीवनदान देने में सक्षम है। 
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उन्होंने बताया कि शिशु को 3 महीने के बाद बिना किसी दवा के सामान्य जीवन जीने की उम्मीद बंध चुकी है, जबकि टीजीए में 80% बच्चों को समुचित इलाज न मिलने के कारण बचाया नहीं जा पाता है। उन्होंने कहा कि हमारा अस्पताल ऐसे मामलों में आयुष्मान योजना और सीएम फंड सहायता प्रदान करता है।

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