स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आशा कार्यकर्ताओं से 21 बिंदुओं पर काम करवा रहे हैं। इसके एवज में उन्हें महज पांच बिंदुओं के कामों का मेहनताना मिल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से सितंबर, 2013 में आशाओं के लिए एक हजार रुपया प्रतिमाह मानदेय देने का आदेश दिया गया है
लेकिन स्वास्थ्य महकमा उन्हें वर्ष सितंबर, 2014 से मानदेय देने की बात कह रहा है। इस रवैये से नाराज आशा बहुओं ने अब अपने हक के लिए प्रशासन से दो-दो हाथ करने की ठान ली है। लड़ाई की रणनीति तैयार करने के लिए बुधवार को कुवर सिंह उद्यान में बैठक की।
आशा बहू कल्याण समिति के सदस्यों की आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष विभा राय ने की। बताया कि अब से आशाएं बाउचर पर काम नहीं करेंगी। क्योंकि यह महज दिखावा है। शासन द्वारा जो भी पैसा लागू किया गया है, वह पूरी तरह से नहीं मिल रहा।
स्वास्थ्य विभाग जो रकम उन्हें प्रतिमाह देने की बात कह रहा है, उसमें सरकार ने एक हजार रुपया मंजूर किया है। लेकिन ये कटौती कर 750 रुपये ही दे रहे हैं। मांग की कि आशाओं का बकाया उन्हें दिया जाए और जिस मद का पैसा उन्हें दिया जाता है,
उसकी रशीद सहित अन्य लेखा सरकारी अस्पतालों के बाहर चस्पा किया जाए। आशाओं ने चेतावनी दी कि यदि 25 जनवरी तक मांग नहीं पूरी हुई तो वह काम बंद कर डीएम का घेराव करेंगे। इस अवसर पर जिला संरक्षक विजय कुमार, कुसुम आदि मौजूद रहीं।