आजमगढ़। शहर के रैदोपुर तिराहे पर तैनात पुलिस कर्मी उस समय एक प्रसूता के लिए भगवान बन गए जब प्रसव पीड़ा से तड़पते हुए पैदल अस्पताल जा रही थी। प्रसूता सड़क पर गिर कर तड़पने लगी। पुलिसकर्मी ने तत्काल रास्ते से गुजर रहे एक कार सवार को रोककर उसमें प्रसूता को किसी तरह बैठाया और अस्पताल भेजा। अस्पताल पहुंचने के पूर्व ही प्रसूता ने गाड़ी में ही बच्चे को जन्म दे दिया। अस्पताल पहुंचने पर नर्सों ने उसे गाड़ी से कार से निकाला और वार्ड में ले जाकर भर्ती कराया।
जहानागंज थाना क्षेत्र के मुत्तूपुर गांव निवासी ईशा देवी पत्नी प्रताप की डिलेवरी होनी थी। घर पर वह अपने सास के साथ ही थी। पति मुंबई में मजदूरी करता है और लॉक डाउन के चलते वह वहीं फंसा है। सोमवार को दिन में ईशा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। किसी तरह वह सिधारी पुल तक तो आ गई लेकिन उसके आगे आने के लिए वाहन नहीं मिला। वह पैदल ही अपने सास के साथ महिला अस्पताल के लिए चल पड़ी। अभी वह रैदोपुर तिराहे पर ही पहुंची थी कि प्रसव पीड़ा ज्यादा होने के चलते वह सड़क पर गिर पड़ी और तड़पने लगी। यह देख तिराहे पर तैनात पुलिस कर्मी आशीष कुमार तिवारी, कमलेश कुमार व ओंकार सिंह भाग कर उसके पास पहुंचे। महिला को प्रसव पीड़ा होने की जानकारी होते ही वाहन के इंतजाम में जुट गये। इसी दौरान एक व्यक्ति कार से आता दिखाई दिया। जिसे पुलिस वालों ने रोक लिया और उसी में प्रसूता को बैठा कर अस्पताल रवाना किया। सिपाही आशीष अपनी बाइक से पीछे-पीछे जा रहे थे। अस्पताल पहुंचने के पूर्व ही प्रसूता ने कार में ही बच्चे को जन्म दे दिया। अस्पताल पहुंचने पर पर सिपाही ने तत्काल अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। अस्पताल स्टाफ बाहर आया और कार से प्रसूता व नवजात को बाहर निकाल कर वार्ड में ले जाकर भर्ती किया। रैदोपुर तिराहे पर तैनात तीनों सिपाही प्रसूता के लिए जैसे भगवान बन गये थे अन्यथा की स्थिति में वह सड़क पर न जाने कब तक तड़पती रहती। पुलिस कर्मियों के इस सराहनीय कार्य की सभी प्रशंसा कर रहे है। वहीं प्रसूता की सास पुलिस कर्मियों की तारीफ करते नहीं थक रही।