मंडलायुक्त आरपी गोस्वामी ने मंडल में धान क्रय की स्थिति जायजा लेते हुए कहा कि धान की खरीद फरवरी के अंत तक की जाएगी, समय कम है इसलिए लक्ष्य प्राप्ति के लिए खरीद कार्य में और तेजी लाई जाए।
मंडलायुक्त कार्यालय में मंडल में कार्यरत क्रय एजेंसियों की समीक्षा के दौरान कतिपय क्रय एजेंसियों की खरीद अत्यंत कम मिलने पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि धान खरीद लक्ष्य में बहानेबाजी नहीं चलेगी।
उन्होंने कहा कि मिलरों से अनुबंध में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। कहा कि यदि एक एजेंसी द्वारा चावल मिल को गारंटी दी जाती है तो सभी एजेंसियों द्वारा उस मिल को गारंटी देना जरूरी नहीं है।
उन्होंने निर्देश दिया कि क्रय एजेंसियां धान की गुणवत्ता छिलके के आधार पर नहीं, बल्कि उसके चावल के आधार पर पर रखें, यदि चावल सही है तो उसे जरूर खरीदा जाए। क्रय केंद्रों का लगातार निरीक्षण होना चाहिए और केंद्र समय से खुलें।
इस दौरान मिलरों ने मंडलायुक्त को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। मिलरों ने कहा कि प्राय: दो-तीन महीने बाद एफसीआई द्वारा चावल की क्वालिटी खराब बताकर उसे वापस कर दिया जाता है, जिससे काफी नुक्सान होता है।
मंडलायुक्त सभी क्रय एजेंसियों के जिला प्रबंधकों से कहा कि मानक सही लिने पर धान खरीदा जाए। उन्होंने संभागीय खाद्य नियंत्रक को निर्देश दिया कि मिलरों की जो भी समस्याएं हैं उसका समाधान तत्परता से करें।
मिलरों से कहा कि अपने बकाए की धनराशि शीघ्र जमा करें तथा पुराने ऐसे बाकाएदार मिलर जो वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं, उनसे भी बकाए की धनराशि शीध्र जमा कराई जाए।
इस मौके पर अधिकारियों सहित अन्य क्रय एजेन्सियों के जिला प्रबन्धक तथा तीनों जनपद मिलर्स उपस्थित थे।