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मीरा या विजय सपा किस पर लगाएगी दांव

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आजमगढ़। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी सपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। जबकि सपा के गढ़ में सत्तारूढ़ भाजपा और बसपा भी इस कुर्सी को हासिल करने के लिए जोर लगाएगी।
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यहां कुर्सी ज्यादातर सपा और बसपा के बीच ही झूलती रही है। इस बार सपा में दो मजबूत दावेदार हैं और दोनों ही अपनी-अपनी सीटों से जीत हासिल कर चुके हैं। अब देेखना है कि पार्टी इसमें से किसे अपना उम्मीदवार बनाती है। पार्टी मुखिया दोनों विजेताओं को लेकर अस्मंजस में है। चाहे पूरे प्रदेश में कोई भी लहर रही हो कभी यहां सपा तो कभी बसपा अपना परचम फहराती रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी भी इस बात की गवाह रही है। क्योंकि यह गरिमामयी कुर्सी कभी सपा तो कभी बसपा के खेमे में झूलती रही। सपा से मीरा यादव दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी है। इस बार भी उन्हें इस सीट का प्रबल दावेदार माना जा रहा हैं। इस बार भी वह ऊसुरकुढ़वा सीट से जीत हासिल कर इस सीट की दावेदार बन गई हैं। वहीं पूर्वमंत्री दुर्गा प्रसाद यादव भी इस कुर्सी पर अपने बेटे पूर्व प्रमुख विजय यादव को बिठाने का मंसूबा पाले हैं। सेठवल सीट से विजय यादव जीत हासिल कर चुके हैं। ऐसे में मीरा यादव के लिए इस बार कुर्सी पाना आसान नहीं होगा। वहीं मीरा यादव के रहते विजय यादव की राहें भी आसान नहीं है। पिछले जिला पंचायत चुनाव के कटु अनुभव से मीरा यादव पूरी तरह से वाकिफ हैं। क्योंकि पिछली बार पार्टी ने उनके स्थान पर दुर्गा यादव के भतीजे प्रमोद यादव अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन बाद में पार्टी ने प्रमोद यादव के स्थान पर मीरा यादव को पार्टी का उम्मीदवार बना दिया। प्रदेश में सत्ता होने के कारण पार्टी ने मीरा यादव को अध्यक्ष बनवा लिया। बीच में एक बार प्रमोद यादव उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए लेकिन वह धड़ाम हो गया। इसे देखते हुए इस बार मीरा यादव की राह आसान नहीं है। पूर्वमंत्री दुर्गा प्रसाद यादव की गिनती पार्टी के दिग्गज नेताओं में होती है। कोई भी लहर हो वह अपनी सीट को बचाने में कामयाब रहते हैं। जिसे देखते हुए पार्टी में भी उनकी अच्छी छवि है। जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अगर पूर्व मंत्री के घर आए तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। वैसे निर्णय सपा मुखिया अखिलेश यादव को लेना है। अब देखना है इस बार वह किसे इस कुर्सी के लिए उम्मीदवार बनाते हैं। इस बार भाजपा और बसपा भी इस कुर्सी के लिए पूरा जोर लगाएंगी। क्योंकि यह कुर्सी निर्दलों के फैसले पर टिक गई है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी से संजय निषाद जो टहरकिश़ुनदेवपुर से चुनाव जीते हैं वह भाजपा नेता कन्हैंया निषाद के लड़के हैं पार्टी उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं। लेकिन कम सीटों पर मिली जीत उनके इस कार्य बाधक बन सकती है। निर्दलों को अपने पक्ष में करने की तैयारी में पार्टी के धुरंधर जुट गए हैं।
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