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'क्या पता कि आखिरी होगी नमाज'

Sun, 28 Feb 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
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बिलरियागंज थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव निवासी मुदस्सिर की जघन्य हत्या से जहां उसके गांव के लोग हतप्रभ हैं, वहीं मुदस्सिर के खुबियों को याद कर न केवल घर वाले रो रहे। बल्कि गांव के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे। रविवार अपराह्न तीन बजे उसके घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। लोगों के बीच में मुदस्सिर का पिता मो. आजम यह कहते हुए रोक रहा था कि हमें क्या पता कि जुमे की रात वह आखिरी नमाज पढ़ाकर हमसे जुदा हो जाएगा।
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दरवाजे पर मौजूद भीड़ को बताते हुए मो. आजम ने कहा कि शुक्रवार की रात को वह मस्जिद में लोगों को नमाज पढ़ाकर घर आया और भोजन कर टहल रहा था। तभी किसी का फोन आया और मुदस्सिर घर से निकल गया। जाते समय वह किसी की बाइक पर गया। रात करीब नौ बजे मुदस्सिर के मोबाइल से फोन आया। कोई दूसरा आदमी आवाज बदलकर कहा कि मैं मुदस्सिर बोल रहा हूं। एक शादी में आया हूं।

आप लोग हमारा इंतजार मत करना। आजम के अनुसार, इस फोन के करीब 15 मिनट बाद फिर एक फोन आया। इस बार कोई महिला बोल रही थी। उसने कहा कि मुदस्सिर आजमगढ़ शहर में एक शादी में आया है। सुबह जाएगा। शनिवार की सुबह तक वह घर नहीं पहुंचा तो आजम शहर के रहने वाले अपने परिचितों को फोन कर संपर्क किया लेकिन कोई पता नहीं चला।
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इतना बताने के बाद आजम की आंखें भर आईं और वह फफककर रोने लगे। वहां मौजूद असलम, जाकिर नोमानी, नसीम अहमद आदि ने भी मुदस्सिर के हंसमुख स्वभाव और छोटे बच्चों को देने वाले तालिम का बखान किए। गांव वाले भी इस जघन्यता से आहत हैं। लोगों ने बताया कि मुदस्सिर की मौत के बाद उसके पिता आजम उसकी रिकार्ड की गई बातों को सुनकर रो रहे हैं। आजम और उसकी पत्नी मोहसीना सहित परिवार के सदस्यों का हाल बेहाल है। गांव के लोग ढांढस बंधा रहे थे।
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