सरायमीर। कस्बे के स्टेशन रोड पर रविवार की रात ‘बज्म कैफी आजमी’ की ओर से आयोजित कवि गोष्ठी में डॉ. आफताब मुजाहिद की बच्चों पर लिखी कविताओं पर आधारित आठ किताबों का विमोचन कवि मंसूर आजमी ने किया। इसके बाद कवियों ने अपनी गजलों की प्रस्तुत दी। अध्यक्षता डॉ. शफीक आजमी और संचालन बज्मे मोहसिन के सचिव फ़राज अदीबी मुबारकपुरी ने की। विशिष्ट अतिथि शायर मंसूर आजमी रहे।
मंसूर आजमी ने सुनाया कि हम सरायमीर आए हैं मुबारकपुर से, दौलते इश्कों वफा की चाशनी ले आए हैं। सगीर अनवर मोहम्दाबादी ने सुनाया ‘किस्सा पारीना बन जाए न तेरी दास्तां चोंच में शाहीन अपनी कंकरी ले आए हैं। मिल्लत लोहायावी ने सुनाया ‘इल्म के गुलशन में नजरों के खिलाकर तुम गुलाब बन गए हो...।’ डॉ. मतीन खैराबादी ने सुनाया ‘चूम कर दारों रसन तेरे लिए हम ऐ वतन मुल्क में जम्हूरियत की रोशनी ले आए हैं’।
फराज अदीबी ने सुनाया ‘हैं खड़े साहिल पे दरिया पार करने के लिए, कैसी नादानी है कश्ती कागजी ले आए हैं’। सागर जौनपुरी, इरशाद आजमी, मजहर आजमी, जमीर अहमद जमीर, बर्क गोरखपुरी, डॉ. आफताब मुजाहिद, याकूब आजम, फैयाज अलीग, नेहाल मनचला, अबू तलहा मुबारकपुरी, अब्दुल रहीम हजीन, डॉ. आतिश शिराजी, साजिद बदर आदि ने अपनी गजलें प्रस्तुत कीं। इस दौरान अगले महीने होने वाली कवि गोष्ठी (ये रस्ता दुश्वार बहुत है) का मिसरा तय हुआ है।