बिहार के औरंगाबाद में सोमवार को हुए नक्सली हमले में जनपद ने एक और होनहार बेटा खो दिया। जैसे ही यह सूचना गांव पहुंची, शहीद जवान के परिवार में कोहराम मच गया। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का भी तांता लगा रहा। मंगलवार देर शाम तक शहीद सिनोद का शव गांव नहीं पहुंच सका था।
बिहार के औरंगाबाद जिले के सोनदाहा जंगल में सोमवार को नक्सलियों द्वारा बारूदी सुरंग बिछाकर सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया गया था। इसमें निजामाबाद क्षेत्र के गौसपुर घूरी
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गांव निवासी सिनोद कुमार पुत्र तूफानी राम शहीद हो गए। सिनोद दो भाइयों में छोटा था। उसका बड़ा भाई विनोद मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता है। 24 वर्षीय सिनोद वर्ष 2011 में सीआरपीएफ में आरक्षी के पद पर भर्ती हुआ था। इलाहाबाद में प्रशिक्षण के बाद उसकी पहली पोस्टिंग ओडिशा में हुई। लगभग ढाई वर्ष पूर्व सिनोद की तैनाती बिहार में सीआरपीएफ की कोबरा कमांडो यूनिट में हुई थी।
सोमवार को सिनोद अपने साथियों के साथ ड्यूटी पर निकला था। उनका वाहन जैसे ही डुमरी नाले के पास पहुंचा, नक्सलियों ने विस्फोट कर वाहन को उड़ा दिया। विस्फोट में सीआरपीएफ के दर्जनभर जवान शहीद हो गए। मंगलवार सुबह सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ने विनोद को फोन पर सिनोद के शहीद होने की सूचना दी। सिनोद के मौत की सूचना मिलते ही मां कवलपत्ती, पत्नी जाह्नवी का रो-रोकर बुरा हाल है। सिनोद की बहन रीता भी मायके पहुंच गई।