सगड़ी तहसील क्षेत्र के सोनौरा ढाले में अस्थाई पुल बनाते ग्रामीण।
जनपद की उत्तरी सीमा को छूकर गुजरने वाली घाघरा एक बार फिर तबाही मचाने को तैयार है। नदी दोनों गेजों पर खतरा बिंदु को पार कर चुकी है। जिसे देख ग्रामीण काफी सहमे हुए हैं। वहीं अभी तक प्रशासन द्वारा स्थापित बाढ़ चौकियां सक्रिय नहीं हुई हैं। कई क्षेत्रों में जलभराव होने के बाद भी अभी तक नाव नहीं चलाई गई है। जिसके कारण ग्रामीणों की दुश्वारियां और बढ़ गई हैं।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा दोनों गेजों पर मंगलवार को खतरा बिंदु का पार कर गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से जहां ग्रामीणों के माथे पर शिकन की लकीरें उभर आई हैं। वहीं रास्तें पर पानी चढ़ने से उनकी दुश्वारियां बढ़ गई हैं। ग्रामीणों को पानी में घुसकर आवागमन करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा वैसे तो महुला गढ़वल बांध पर 10 बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है। लेकिन अभी तक इसमें से एक भी बाढ़ चौकी अभी तक सक्रिय नहीं हुई है। जबकि प्रशासन ने दावा किया था कि जैसे ही नदी खतरा बिंदु को पार करेगी वैसे ही बाढ़ चौकियां सक्रिय हो जाएंगी।
सोमवार की शाम चार बजे घाघरा नदी का जलस्तर बदरहुंआ गेज पर 71.45 मीटर था। जो मंगलवार की शाम चार बजे 71.69 मीटर हो गया। जो खतरा बिंदु 71.68 से एक सेमी ऊपर है। वहीं झिघिया नाले पर सोमवार की शाम चार नदी का जलस्तर 70.60 मीटर था। जो मंगलवार की शाम चार बजे 70.85 मीटर पर पहुंच गया।
जो खतरा बिंदु 70.40 मीटर से 45 सेमी ऊपर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से इससे घिरे गांवों के बच्चों और महिलाओं का आवागमन बंद हो गया। वहीं प्रशासन द्वारा नाव न चलवाने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।