प्रख्यात नाटककार, महान कवि और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. लक्ष्मी
नारायण मिश्र की जयंती रविवार को नेहरू हाल सभागार में एकीकरण समिति के
तत्वावधान में मनाई गई।
इस अवसर पर लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर
श्रद्धांजलि दी। साथ ही उनके जीवन पर रोशनी डाली।
मुख्य विकास अधिकारी
अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र विराट व्यक्तित्व के
धनी थे।
उनका मूल्यांकन हम लोग नहीं कर सकते। उनके दिखाए गए
रास्ते को हमें आत्मसात करना चाहिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए
जिला पंचायत अध्यक्ष मीरा यादव ने कहा कि आजमगढ़ की धरती महान स्वतंत्रता
सेनानियों, कवियों और साहित्यकारों की धरती है
जिन्होंने अपनी लेखनी के
माध्यम से जिले का नाम रोशन किया। बताया कि पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र ने
100 से अधिक एकांकियां और 25 नाटकों का सृजन किया है। समस्या प्रधान लेखन
में वह पहले स्थान पर रहे जो हमारे लिए गौरव की बात है।
गोष्ठी को पं.
लक्ष्मी नारायण मिश्र के पुत्र विश्वंभरनाथ मिश्र, साहित्यकार अमरनाथ
तिवारी, वीरभद्र प्रताप सिंह, जगदीश प्रसाद बरनवाल, पूर्व प्रधानाचार्य
मालटारी रवींद्र राय, कन्हैया लाल यादव, मुसाफिर यादव, बनवारी लाल जालान,
जन्मेजय पाठक, अनिल तिवारी, डा. वेद प्रकाश उपाध्याय आदि ने संबोधित किया।
इस
मौके पर डा. हरिराम यादव, डा. डीपी सिंह, उमैर सिद्दीकी नदवी, डा. उस्मान
गनी आदि उपस्थित थे। संचालन साहित्यकार प्रभुनाथ पाण्डेय ने किया।
जीवन
पर रोशनी डालीआजमगढ़। गुरुघाट स्थित रामजानकी मंदिर परिसर में सोमवार को
पं. लक्ष्मीनारायण मिश्र की जयंती पर संस्कृति सेवा विकास मंच के तत्वावधान
में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर लोगों ने उनके चित्र पर
माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
साथ ही उनके जीवन पर चर्चा की। प्रो.
प्रभुनाथ सिंह मयंक ने कहा कि पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र छायावादी कविता के
पुरोधा, क्रांतिदर्र्शी कवि और नाट्य सम्राट थे।
इस मौके पर
सुभाष तिवारी कुंदन, श्याम बहादुर सिंह, संजय पांडेय,
विश्वनाथ यादव, कमला सिंह, पारसनाथ सिंह तथा रामधारी यादव सहित कई गणमान्य
लोग उपस्थित थे।