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महिलाओं को हुनरमंद बना रही गांव की बहू

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महिलाओं को सिलाई कढ़ाई सिखाती नीलम। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। दूसरी महिलाओं के लिए सिलाई कढ़ाई करना भले ही विवशता हो, लेकिन नीबी गांव की रहने वाली नीलम के लिए यह बस शौक है। यही शौक अब क्षेत्र में उनकी पहचान बन चुका है। सुई धागे पर थिरकती उंगलियां उनके हुनरमंद होने का सबूत देती हैं। इसी हुनर की बदौलत नीलम ने अब तक कई गरीब, असहाय महिलाओं को यह फन सिखाया और उन्हें हुनरमंद बनाया।
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वर्तमान समय में जहां दूसरे के बारे में लोगों को सोचने तक की फुर्सत नहीं है, वहीं पल्हनी विकास खंड के नीबी गांव की बहू नीलम देवी दूसरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपना महत्वपूर्ण समय दे रही हैं। वह इलाके की बहू-बेटियों को पूरी ईमानदारी से सिलाई-कढ़ाई सिखा रही हैं। इलाके में सुबह से शाम तक हाथों में प्लास्टिक के थैले थामे और उनमें कपड़ों के टुकड़े व सूई-धागे लेकर ग्रामीण महिलाएं आती-जाती दिख जाती हैं। यह बहू-बेटियां कहीं और से नहीं बल्कि नीलम के सिलाई-कढ़ाई सेंटर नीबी से आती हैं। यहां वह महिलाओं को हुनरमंद बना रही हैं। उनके इस जज्बे को हर कोई सलाम करता है। नीलम कहती हैं कि वर्तमान समय में जब तक हम बेटियों को आत्मनिर्भर बना घर के खर्चे में दो पैसे का सहयोग नहीं कराएंगे, तब तक इस महंगाई के युग में एक व्यक्ति से परिवार का गुजर-बसर नहीं होने वाला है। इसीलिए हमने ठाना कि अपने जैसे और भी बहू-बेटियों को सिलाई-कढ़ाई व डिजाइनिंग सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं। ताकि उन्हें अपना रोजगार मिल सके। वह बताती हैं कि उन्हें इस कार्य में अच्छी सफलता मिल रही है।
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सीखने के लिए देती हैं सारी सामग्री
सिलाई सेंटर की संचालिका नीलम कहती हैं कि मेरे यहां जो भी बहू-बेटियां सिलाई, कढ़ाई सीखने आती हैं, उनको अपनी तरफ से सभी सामग्री सीखने के लिए उपलब्ध कराती हूं। वह बताती हैं कि अधिकांश महिलाएं एक माह में ही सिलाई का कार्य सीख लेती हैं। इनमें से अधिकांश आस-पास के क्षेत्र की बेटिया हैं। वे काफी उत्साहित होकर यहां काम सीखने के बाद जाती हैं।
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12 साल से दे रहीं हैं प्रशिक्षण
नीलम ने वर्ष 2008 के जनवरी माह में सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण कार्य को प्रारंभ किया था। शुरू में तो काफी कम एक-दो महिलाएं ही इसके लिए तत्पर हुई। धीरे-धीरे जब इसकी जानकारी होने लगी तो काफी संख्या में महिलाएं आने लगीं। आज इनकी संख्या में काफी इजाफा हो चुका है। वह बताती हैं कि वर्तमान में प्रतिदिन 40 बहू-बेटियां यहां प्रशिक्षण ले रहीं हैं। कोरोना के चलते सभी अलग-अलग समय में यहां सीखने आती हैं। अब तो यहां प्रशिक्षण ले चुकि महिलाओं की संख्या करीब 400 को भी पार कर चुकी है।
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