जुलाई के प्रथम सप्ताह से घाघरा खतरा बिंदु से ऊपर बनी हुई है। देवारा क्षेत्र के जिन गांवों में बाढ़ का पानी भरा है वहां गंदगी की वजह से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। इसके चलते बाढ़ प्रभावित लोग बुखार, खुजली, उल्टीदस्त आदि बीमारियों से पीड़ित होते जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि तय बाढ़ चौकियों पर चिकित्सक की तैनाती तो की गई है लेकिन वे वहां उपलब्ध नहीं मिल रहे हैं जिससे उन्हें प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से बाढ़ क्षेत्र में महुला-गढ़वल बांध पर 10 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इस बाढ़ चौकियों पर चिकित्सक और कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं ताकि लोगों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सके लेकिन शिकायत मिल रही है कि चौकियों पर डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं बैठ रहे हैं। गांवों में मलेरिया, टायफायड, चर्म रोग, उल्टी दस्त आदि संक्रामक बीमारियों ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं।
बुधवार को इन बीमारियों से पीड़ित राजेंद्र यादव (40), भानमती (48), जयशंकर (25), उमाशंकर (40), आलोक (13), खूशबू (13), अभिषेक पांच, सुभावी पांच, बिंदु (40), लालती (42), शिवम (चार), स्तुति (12), ऐशी (11), सुशीला देवी (45), रुद्रांश (छह), चानमती (55), सुनीता (35) आदि बाढ़ चौकी हाजीपुर पर चिकित्सक के न मिलने पर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाजीपुर पहुंचे लेकिन वहां भी कोई चिकित्सक नहीं मिला।
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट ने उन्हें दवा दी। चक्की, देवारा खास राजा, भदौरा, बांका के मरीजों को बाढ़ चौकी हाजीपुर बंद होने के कारण प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। निराला भारती का आरोप है कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आ रही है। जब पीड़ित स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं तो वहां भी चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोग प्राइवेट चिकित्सकों के पास मजबूरी में जाने को मजबूर हैं।