कंबाइन मशीन से गेहूं की कटाई के बाद खेत में पड़े रह गए डंठल को किसान खेत में ही जला रहे हैं। इससे पर्यावरण को खतरा होने और मिट्टी की उर्वर क्षमता खत्म होने को लेकर शासन में खेत में गेहूं के अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। खेत में गेहूं के अवशेष जलाने के बाद सिंचाई करने से पानी पर राख की परत जम जाती है जिससे उर्वरता बढ़ाने में जीव आक्सीजन न मिलने से मर जाते हैं। वहीं अवशेष को जलाने से उठने वाले धुएं से न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि आसपास इसकी जद में आने से विभिन्न प्रजाति की पक्षियों की जान को खतरा पैदा हो गया है।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के बिलरियागंज, मधनापार, नसीरपुर, छींही, छिछोरी, रामगढ़, बांसगांव, सरगहा सागर, बाजार गोसाई, मनिकाडीह, भदांव, सगड़ी, अंजान शहीद, करमैनी, चांदपट्टी, भीमबर, बिंदवल, अडाखोर सहित पूरे क्षेत्र में किसानों ने गेहूं की कटाई के बाद अवशेष को खेत में ही जला दिया है। जिन किसानों के पास अधिक खेती है वे किसान गेहूं की फसल को कम्बाइन से कटवाते हैं।
मशीन से कटाई के बाद खेत में छूटे गेहूं के डंठल रह जाते हैं जिसे जलाने के बाद किसान सिंचाई कर देते हैं। धुएं से न सिर्फ आग की घटना होने की आशंका रहती है बल्कि आसपास सड़क पर गुजरने वाले वाहन चालकों को कुछ दिखाई नहीं देता है जिससे दुर्घटना हो जाती है। धुएं से पर्यावरण प्रदूषित होने से विभिन्न प्रजाति की पक्षियां भी मर जाती है। खेत की डंठल जलाने से मिट्टी की उर्वर क्षमता भी खत्म हो जाती है।
अवशेष जलाने के बाद सिंचाई करने से पानी पर राख की परत जम जाती है जिससे मिट्टी में मौजूद केचुएं और उवर्ररता बढ़ाने वाले अन्य जीव आक्सीजन नहीं मिलने से मर जाते हैं। ऐसे में अगर कई वर्षों तक खेतों में अवशेष जलाए जाते रहे तो आने वाले दिनों में मिट्टी की उर्वर क्षमता खत्म हो जाएगी।