मंडलायुक्त आरपी गोस्वामी ने कहा है कि महान शिक्षाविद् और चिंतक अल्लामा शिब्ली नोमानी के सिद्घांतों और उनकी तालीम पर अमल करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्घांजलि होगी। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें आज भी प्रासंगिक हैं।
वह बुधवार की देर शाम हरिऔध नगर कालोनी स्थित डा. श्रीनाथ सहाय के आवास पर साहित्यिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कहा कि देश के चतुर्दिक विकास के लिए लोगों का शिक्षित होना आवश्यक है।
अल्लामा ने अपनी मंशा को जाहिर करते हुए ही आजमगढ़ में शिब्ली नेशनल कालेज और दारूल मुसन्नफीन की बुनियाद डाली। इंसानियत के संदेश को विश्व के कोने-कोने में फैलाकर एक नई दिशा दी।
शिब्ली एकेडमी के स्कालर उमैर सिद्दीकी नदवी ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी और उनके सहायकों ने अरबी भाषा में जितनी भी पुस्तकें लिखी हैं उनमें आजादी और आजादी के पहले के माहौल का उल्लेख है।
उनकी पुस्तक अलइंतेखाब की सराहना भारत के अलावा अरब देश के लोग भी करते हैं। साहित्यकार डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी उर्दू के ऐसे साहित्यकार थे जिन पर आजमगढ़ को गर्व है।
अध्यक्षता करते हुए शिब्ली के उर्दू विभागाध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन ने कहा कि उनकी स्मृति में एशिया की बहुत बड़ी उर्दू की लाइब्रेरी शिब्ली एकेडमी है।
जनार्दन विद्यार्थी ने कहा कि विंदवल जयराजपुर की धरती उन्हें जन्म देकर धन्य हुई है। संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक डा. निर्मल कुमार श्रीवास्तव ने आभार जताया। इस मौके पर डा. कौशलेंद्र मिश्र, डा. बीएस मिश्र,
डा. आरके सिंह, विजय कुमार श्रीवास्तव, एसबी तिवारी, आनंद कुमार श्रीवास्तव, डा. जय प्रकाश यादव आदि उपस्थित हुए। संचालन प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी ने की।