आजमगढ़। उप्र में नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधि अब अपने अधिकारों और क्षेत्रीय विकास के लिए संगठित होकर सड़क पर उतर आए हैं।
मंगलवार को उत्तर प्रदेश सभासद एसोसिएशन (नगरीय निकाय) के बैनर तले सभासदों ने राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया।
इस पैदल मार्च का नेतृत्व एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष व जिला योजना समिति के सदस्य मोहम्मद अफजल ने किया। प्रदर्शन के दौरान सभासदों ने अपनी दस सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मार्च से पहले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित जनसभा में मोहम्मद अफजल ने कहा कि सभासद अपने वार्ड का पहला जनप्रतिनिधि होता है, लेकिन उसे न तो अधिकार हैं, न ही संसाधन। नतीजतन विकास कार्य अधर में लटक जाते हैं। यदि प्रदेश सरकार वाकई जमीनी विकास चाहती है, तो सभासदों को अधिकार देना ही होगा।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और सभासदों की कार्यशैली में समन्वय की कमी के कारण क्षेत्रीय विकास बाधित हो रहा है। सभासदों को स्वतंत्र विकास निधि, अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
सभासदों ने मांग की कि उनको 35 लाख रुपये वार्षिक विकास निधि मिले, हर माह 15 हजार रुपये मानदेय, मेयर व चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सुविधा, डिप्टी मेयर, उपाध्यक्ष व वाइस चेयरमैन के पदों की बहाली, सभासद के आकस्मिक निधन पर परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, जिला मुख्यालय तक यात्रा के लिए पांच वर्षों तक रोडवेज व रेल का मुफ्त पास, सहायक अभियंता को स्टीमेट जारी करने का अधिकार सीधे सभासदों से जुड़ा हो, आउटसोर्सिंग में कर्मचारियों की नियुक्ति में सभासदों की भागीदारी, 1 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए सभासदों को स्वतंत्र निर्णय का अधिकार, मुख्यमंत्री राहत कोष से गंभीर मरीजों के लिए सहायता देने का अधिकार मिले।