अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा में लापता एक व्यक्ति की जमीन हाईवे में आने पर फर्जी आदमी को खड़ा कर 96 लाख मुआवजा हड़पने के मामले में पुलिस ने दो आरोपी परशुराम दूबे निवासी खेतापुर थाना रौनापार और विजय प्रकाश मिश्र निवासी मिश्रौलिया थाना अतरौलिया को गिरफ्तार किया, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं।
अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा निवासी सुग्रीव पिछले लगभग 20 साल से लापता है। उसकी अराजी-86 की 0.1730 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाईवे 233 में आई थी। इस भूमि पर फर्जी तरीके से किसी और को सुग्रीव बनाकर 96 लाख मुआवजे की रकम हड़प ली गई थी।
अमर उजाला ने एक नवंबर के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद दो नवंबर को विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के अमीन योगेन्द्र सिंह ने शहर कोतवाली में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सीओ नगर सच्चिदानन्द के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली योगेन्द्र बहादुर सिंह ने मामले की जांच की। इसी क्रम में रविवार को पुलिस टीम ने रोडवेज से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों ने बताया कि उनकी मुलाकात बेलकुण्डा बाजार में वेद प्रकाश मिश्रा निवासी मिश्रौलिया थाना अतरौलिया से हुई थी। वेद प्रकाश ने ही उन्हें दयानन्द तिवारी निवासी भीलमपुर छपरा थाना अतरौलिया से मिलवाया।
इसके बाद वेद प्रकाश ने परशुराम का सुग्रीव के नाम से फर्जी पैन कार्ड और आधार कार्ड बनवाया। साथ ही शहर के सिविल लाइंस स्थित इंडसइंड बैंक में सुग्रीव के नाम से फर्जी खाता भी खुलवा दिया।
तीनों इसके बाद अजगरा निवासी सुमन सिंह से मिले। सुमन सिंह ने अधिकारियों से मिलीभगत कर कागजात तैयार कराए। पैरवी के बीद तीन अगस्त 2017 को विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय से खाते में 95,89,823 का भुगतान कर दिया गया।
चार अगस्त को 21 लाख रुपया परशुराम ने सुग्रीव बनकर निकाल लिया। पांच अगस्त को चेक के माध्यम से पैसा ट्रांसफर कर 43 लाख का सोना खरीदा गया और दो लाख का बीमा कराया गया। आठ अगस्त को 20.50 लाख निकाला गया। परशुराम ने बताया कि निकाला गया रुपया और सोना तीन अन्य आरोपियों के पास है।
एसपी अजय साहनी ने बताया कि बैंक कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। साक्ष्य के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी हो रही है। फरार आरोपी वेदप्रकाश मिश्र, सुमन सिंह पत्नी राम अवतार सिंह निवासी अजगरा, दयानन्द तिवारी उर्फ मोटू तिवारी के गिरफ्तारी का प्रयास जारी है।
मोबाइल से पकड़े गए आरोपी
आजमगढ़। मुआवजे के नाम पर 96 लाख हड़पने के मामले की जांच कर रहे शहर कोतवाल योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि आरोपियों के बीच परशुराम के एक मोबाइल से बातचीत होती थी।
रकम निकलने के बाद आरोपियों ने सिम तो फेंक दिया, लेकिन मोबाइल परशुराम के पास था। इसी से पुलिस आरोपी तक पहुंची थी। आरोपियों से दो मोबाइल, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बरामद हुई है।
बोला आरोपी, मिले सिर्फ 15 हजार
आजमगढ़। गिरफ्तार आरोपी परशुराम ने बताया कि उसे सुग्रीव बनने के लिए लाखों रुपये देने का लालच दिया गया था, लेकिन अन्य आरोपियों ने उसे मात्र 15 हजार रुपये दिए थे। वहीं, शहर कोतवाल योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि आरोपी झूठ बोल रहा है। मुआवजे की रकम से ही उसने एक ट्रक भी खरीदा है। अभी परशुराम की ओर से सुग्रीव नाम से खोले गए खाते में लगभग साढ़े नौ लाख रुपये शेष हैं, जिसे सीज कर दिया गया है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के पता चलेगा कहां गया 86 लाख
आजमगढ़। मुआवजे के बाद खाते में 95,89,823 रुपये आए थे। 21 लाख परशुराम ने सुग्रीव बनकर निकाले थे। 43 लाख का सोना खरीदा गया था और दो लाख का बीमा कराया गया था। इसके बाद फिर 20.50 लाख रुपया निकाला गया। परशुराम के अनुसार ये रुपये और सोना तीन फरार आरोपियों ने ले लिए थे।