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नाबालिग के साथ दुष्कर्म के प्रयास में दो अभियुक्तों को तीन साल की कैद

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अदआजमगढ़। 14 वर्षीय बालिका का रास्ता रोकर कर लज्जा भंग करने के आशय से आपराधिक बल प्रयोग करने दो आरोपियों को अदालत ने तीन वर्ष कैद के साथ 4500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। गुरुवार को यह फैसला पास्को कोर्ट के न्यायाधीश रामेंद्र कुमार ने सुनाया।
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पवइ्र थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने स्थानीय थाने में चार सितंबर 2016 को ढ़ाका नरवारी गांव के रहने वाले आरोपी विरेंद्र विंद पुत्र रंमतेरस और दीपक पुत्र संतराम के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने आरोप लगाया कि घटना के दिन उसकी लड़की स्कूल में पढ़ने के लिए जा रही थी। रास्ते में सूनसान देखकर आरोपी उसे जबरदस्ती बेलवाई रेलवे स्टेशन ले गए। बुरी तरह से उसके साथ छेड़खानी किए और घटना के पांच-छह दिन बाद बालिका अपने घर वापस लौटी। उसने घटना की जानकारी अपने परिवार के लोगों को दी। इस मामले में पवई पुलस ने दोनों आरोपियों के विरुद्घ भादवि की धारा 354/342 और धारा 7/8 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अिधिनियम 2012 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान इस मुकदमें की अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्र ने इस मुकदमे के वादी पीड़िता की मां, पीड़िता समेत कुल पांच गवाहों को अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद में दोनो आरोपी बीरेंद्र और दीपक को भादवि की धारा 354 में तीन वर्ष की सश्रम कैद दो हजार रुपये जुर्माना, धारा 342 में छह माह की सश्रम कारावास के साथ 500 रुपये अर्थदंड और धारा 7/8 में तीन वर्ष की कैद के साथ दो हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि जमा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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