रोडवेज के पास रोडवेज बसों और निजी यात्री वाहनों के सड़क पर खड़े होने से आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को अगले साल जनवरी से मुक्ति मिल जाएगी। अत्याधुनिक रोडवेज भवन का निर्माण करीब 70 फीसदी तक हो चुका है। दिसंबर तक काम पूरा होने के बाद जनवरी से जाम की समस्या से निजात के साथ ही यात्री सुविधाएं भी मिलने लगेंगीं।
बता दें कि डिपो में यात्रियों को बैठने के लिए उचित स्थान नहीं था। ना ही इस बात का ठिकाना था कि कौन सी बस कहां से मिलेगी। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए 13 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रोडवेज बनाने का निर्णय लिया गया। काम पूरा करने का जिम्मा निर्माण निगम इकाई को सौंपा गया। जून, 2015 में काम शुरू हुआ। रोडवेज भवन टूटने से बसों का संचालन प्रभावित
होने लगा।
अधिकारियों ने राहत के लिए कई उपाय किया लेकिन कोई कारगर नहीं हुआ। आलम यह है कि सारी बसें रोडवेज के बाहर सड़क पर ही खड़ी हो रही हैं। विभाग की सारी बसों के सड़क पर ही खड़ी होने से न केवल जाम लगा रहता है, बल्कि आम लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। इसका फायदा प्राइवेट वाहन चालक भी उठा रहे हैं।