अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार तिवारी की अदालत ने बुधवार को हत्या के तीन अभियुक्तों को दोषी पाते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को कुल 28-28 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की धनराशि प्राप्त होने पर पचास हजार रुपया मृतक की पत्नी को दिया जाएगा।
इसी मामले के नामजद दो आरोपित जाहिद और इस्मिदार की मुकदमा कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी। जब कि एक आरोपी इश्तेयाक के फरार हो जाने से उसकी पत्रावली को अलग कर दिया गया।
मामला देवगांव थाना के बसही अकबालपुर गांव की है। 20 जून 1996 की रात सोते समय प्राणघातक हमला किया गया था। गोली लगने से घायल फौजदार की अस्पताल में मौत हो गई थी। मृतक फौजदार का भाई जगदीश ने गांव के छह लोगों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में कहा था कि गांव के कल्पनाथ से अभियुक्तों की मुकदमे की रंजिश चल रही थी और इसी मुकदमे में मै गवाह था। घटना की रात घर के सामने अपने भाई फौजदार, भाभी उर्मिला, मां दिलराजी सभी लोग आस-पास सो रहे थे।
रात लगभग एक बजे गांव के अलाऊ पुत्र मुर्तुजा, इस्मिदार पुत्र अब्दुल सत्तार, गुफरान, इश्तेयाक पुत्र कय्यूम उर्फ कमालुद्दीन, जाहिद पुत्र सगीर, शादिक पुत्र सगीर असलहों के साथ दरवाजे पर चढ़ आए। अलाऊ और शादिक ने फौजदार और मेरे ऊपर फायर किए। गोली लगने से घायल फौजदार की मौत हो गई।
इस मामले में देवगांव थाना पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमें परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे संयुक्त निदेश अभियोजन एपी वर्मा ने निर्देशन में अभियोजन अधिकारी महेंद्र गुप्त ने इस मुकदमे के वादी समेत कुल छह गवाहों को अदालत में पेश किया और तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद हत्यारोपी अलाऊ, गुफरान और शादिक को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।