आजमगढ़। राजघाट पर सोमवार की देर रात तीन लोगों का अंतिम संस्कार हो रहा था। इसी दौरान कोरोना से मृत एक व्यक्ति का शव लेकर एंबुलेंस मौके पर पहुंच गया। जिससे मौके पर हड़कंप मच गया और वहां मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगे और प्रशासन की व्यवस्था पर आक्रोश जताया। वहीं राजघाट पर आग देने का काम करने वाले अरविंद कुमार की पत्नी ने प्रशासन की व्यवस्था पर नाराजगी जतायी और कोरोना संक्रमित के दाह संस्कार के बाद सैनिटाइजेशन न कराये जाने का आरोप भी लगाया।
राजघाट पर रोजाना औसतन छह-सात शवों का अंतिम संस्कार होता है। सोमवार की देर रात भी इस घाट पर सामान्य मौत हुए तीन लोगों के शवों का अंतिम संस्कार हो रहा था। जिसके चलते घाट पर काफी संख्या में लोग मौजूद थे। जिला प्रशासन ने कोरोना से मृत होने वाले लोगों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी इसी घाट पर की है। लोगों की मौजूदगी के दौरान ही एक एबुलेंस राजकीय मेडिकल कालेज से एक कोरोना संक्रमित का शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए राजघाट पर पहुंच गया। इस बात की जानकारी होते ही मौके पर जुटे लोगों में हड़कंप मच गया। लोग तत्काल इधर-उधर भागने लगे और एंबुलेंस चालक को भला-बुरा कहना भी शुरू कर दिया। इस बीच एसडीएम सदर रावेंद्र कुमार भी आ गए और सामान्य शवों के अंतिम संस्कार के दौरान ही कोरोना संक्रमित के शव का भी राजघाट पर निर्धारित स्थल पर अंतिम संस्कार कराना शुरू कर दिया। इस दौरान राजघाट पर आग देने वाले अरविंद कुमार की पत्नी ने बताया कि कोरोना संक्रमित के शवों का अंतिम संस्कार किसी एकांत घाट पर किया जाना चाहिए लेकिन प्रशासन राजघाट पर अंतिम संस्कार करा रहा है। जिससे यहां आने वालों में हमेशा ही संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमित के दाहसंस्कार के बाद पूरे घाट का सैनिटाइजेशन कराया जाना चाहिए लेकिन प्रशासन ऐसा करा नहीं रहा है।