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Azamgarh News: अस्पताल में 36 वार्ड बॉय फिर भी मरीजों की जांच कराने स्ट्रेचर खींचकर ले जा रहे तीमारदार

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आजमगढ़। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए 36 वार्ड बॉय पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी मरीजों और तीमारदारों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। सोमवार को जिला अस्पताल में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां तैनात अधिकांश वार्ड बॉय आराम कर रहे थे। तीमारदार मरीजों को स्ट्रेचर पर बैठाकर ले जा रहे थे। मंडलीय जिला अस्पताल में 36 वार्ड बॉय तैनात हैं। जबकि, उनके वेतन पर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी मरीजोें और तीमारदारों को परेशान होना पड़ रहा है।
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शहर के कोट की रहने वाली हमीदा खातून पेट की समस्या से परेशान थीं। परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार को वार्ड से कोई कर्मचारी उनको एक्सरे कराने के लिए व्हीलचेयर लेकर नहीं आया। उसके बाद उनके तीमारदार स्ट्रेचर लाए और उनको लेकर एक्सरे कराने ले गए। दातागंज के गांव बेला के रहने वाले विजय ने बताया कि कल से वार्ड में भर्ती हैं। कर्मचारी न तो स्ट्रेचर ला रहे थे न ही उनको ले जा रहे थे। मजबूर होकर परिवार के लोग ही मरीज को स्ट्रेचर पर अल्ट्रासाउंड को ले गए। इस दौरान वार्ड बॉय सामने बैठे रहे। इसी तरह से एक मरीज पैर की पट्टी कराने के लिए आया था। पूछने पर उसने अपना नाम तो नहीं बताया लेकिन उसे स्ट्रेचर पर लादे उसके परिजन उसे ड्रेसिंग रूम से लेकर वार्ड की ओर से ले आए। ऐसे ही मंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों के आवास की तरफ से एक व्यक्ति एक महिला मरीज को लेकर आया। इसके बाद वह अंदर गया और खुद ही स्ट्रेचर को घसीटकर गाड़ी तक लाया। इसके बाद उक्त बीमार महिला को स्ट्रेचर पर लादकर अस्पताल के अंदर गया।
वर्दी में नहीं नजर आया कोई वार्ड बॉय
मंडलीय अस्तपाल में चिकित्सक तो एप्रन में अपनी ओपीडी में बैठकर मरीज देखते मिल जाएंगे। लेकिन, कोई भी वार्ड बॉय अपनी वर्दी में नहीं मिलेगा। जिससे यह भी पहचान करना मुश्किल है कि कौन वार्ड बॉय है और कौन दलाल या फिर आम आदमी।
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वार्ड बॉय की तैनाती ही इसलिए होती है कि वह मरीजों की सहायता करें। अगर किसी मरीज को जांच करानी है तो वह उसे स्ट्रेचर या व्हील चेयर पर उसे लेकर जांच सेंटर तक जाएगा। लेकिन, ज्यादातर वार्ड बॉय स्थानीय है जिसके कारण मनमानी करते हैं। - डाॅ. ओमप्रकाश सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक।
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