आजमगढ़। जलवायु परिवर्तन विश्व को लाचार और बीमार बनाकर उजाड़ रहा है। विश्व में जलयुद्ध मुक्त वैश्विक शांति जल साक्षरता और भारतीय सामुदायिक ज्ञान से ही संभव है। जल स्रोतों का विकास और उनका रखरखाव किसी सरकारी या कारपोरेट की आर्थिक सहायता से नहीं बल्कि सामुदायिक उत्थान से होगा। पर्यावरण में सुधार तभी होगा जब समाज का हर वर्ग सामुदायिक उत्थान से जुड़कर कार्य करेगा। युवा पीढ़ी को जल संकट से मुक्ति की जिम्मेदारी उठानी होगी। ये बातें पर्यावरणविद् व मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित जलपुरुष डॉ.राजेंद्र सिंह ने सोमवार को पर्यावरण एवं वन विभाग के सहयोग शुरुआत समिति की ओर से शिब्ली नेशनल इंटर कालेज में चल रहे 21वें आजमगढ़ पुस्तक मेले में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति और भगवान एक दूसरे के रूपक हैं। भ से भूमि, ग से गगन, व से वायु, अ से अग्नि न से नीर। अर्थात प्रकृति में ही देवत्व समाया हुआ है। डीएफओ संजय विश्वाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण विषय है। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित यह मेला विद्यार्थियों और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र सिंह हम सबके प्रेरणास्रोत हैं। अध्यक्षता करते हुए शिब्ली पीजी कालेज के प्राचार्य मोहम्मद सलमान अंसारी ने कहा कि हमारे परिसर में डॉ. राजेंद्र सिंह का आना हम सबकी खुशनसीबी है। आज के बढ़ते पर्यावरण संकट के दौर में राजेंद्र सिंह की जीवन यात्रा हमें पानी और पर्यावरण संरक्षण की सीख देती है। निजामाबाद विधायक आलमबदी ने कहा कि जल है तो कल है। हमें अपनी प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने के लिए एकजुट होना होगा। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों से सीखना होगा। वे निरक्षर थे फिर भी वे पर्यावरण और मिट्टी के मर्म को समझते थे। शिब्ली इंटर कालेज के प्रधानाचार्य निशार अहमद ने कहा कि पुस्तक संस्कृति का उन्नयन का यह मंच आजमगढ़ के समाज का नवनिर्माण कर रहा है। विशिष्ट अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक डा. वीके शर्मा ने कहा कि जो समाज पढ़ेगा वही बढ़ेगा। डायट प्राचार्य डा. अमरनाथ राय ने कहा कि किताबें बेहतर मनुष्य का निर्माण करती हैं। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष घनश्याम पटेल, सुनील राय, डॉ. रविंद्र नाथ राय, डॉ. शाहिन जाफरी, मोहम्मद खालिद, अलाउद्दीन उपस्थित रहे।