लाटघाट। घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से घटने के बाद सहबदिया और देवारा खास राजा गांवों में कटान शुरू हो गई है। कई गांवों के संपर्क मार्ग अभी भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों का संचालन न होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चक्की, सोनौरा, बांका, बुढ़नपट्टी, मानिकपुर और शाहडीह जैसे गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न हैं, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि बाढ़ खंड विभाग हमेशा कटान शुरू होने के बाद ही सक्रिय होता है।
स्थानीय निवासी योगेंद्र ने कहा यदि समय पर ठोस उपाय किए गए होते, तो यह स्थिति नहीं आती। यह काम केवल दिखावटी है, यहां पक्का निर्माण होना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के कारण हर साल उपजाऊ भूमि नदी में समा रही है। नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज हो रही है।
सोमवार को बदरहुआ नाले पर शाम चार बजे घाघरा का जलस्तर 71.60 मीटर था, जो मंगलवार को 43 सेंटीमीटर घटकर 71.17 मीटर हो गया। इस गेज पर न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर, और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। वहीं, डिघिया नाले पर जलस्तर 71.97 मीटर से 53 सेमी घटकर 71.44 मीटर हो गया।
डिघिया पर न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर, और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता शिवकुमार ने बताया कि जलस्तर तेजी से घट रहा है। वर्तमान में किसी प्रकार की बड़ी समस्या नहीं है।