संदीप सौरभ सिंह
आजमगढ़। मंदुरी हवाई पट्टी को हवाई अड्डे में बदला जा रहा है। उड़ान शुरू करने के लिए हवाई क्षेत्र के दायरे में आ रहे आसपास के मकानों में संशोधन किया जाना था। इसमें नियम विरुद्ध तरीके से अधिकारियों ने तीन मकानों को तोड़कर आंकलन के अनुसार उनका भुगतान भी कर दिया। चौथे मकान के मकान स्वामी की उम्मीद से कम मुआवजा तय किया गया था तो उसने पूरे मामले की पोल खोल दी। शासन से शिकायत होने पर मामले की जांच कमिश्नर ने कराई तो इसमें तत्कालीन सीआरओ, पीडब्ल्यूडी के जेई और एसएलओ दफ्तर के लिपिक पर फंदा कस गया है। इसके साथ ही वर्तमान सीआरओ को भी आंशिक रूप से दोषी पाया गया है। सभी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति कर दी गई है।
रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत चयनित मंदुरी हवाई पट्टी को हवाईअड्डे में तब्दील किया जा रहा है। इसके लिए हवाईअड्डे के विकास के साथ ही उड़ान के क्षेत्र में बाधक बनने वाले मकान आदि को भी संशोधित किया जाना था। शासन के निर्देश पर इसमें चार मकानों को चिह्नित किया गया था। पीडब्ल्यूडी से आकंलन कराने के बाद विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय की ओर से तीन मकानों को पूरी तरीके से तोड़ कर उनका लगभग एक करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान भी कर दिया। चौथे मकान के स्वामी विन्ध्याचल पुत्र शिवजटा चौबे के मकान का आंकलन पहले 63 लाख के आसपास किया गया गया। बाद में इसमें कुछ और हिस्सों को शामिल कर उनके मकान का आंकलन 1.29 लाख के आसपास किया गया। अभी भुगतान भी नहीं हुआ था कि मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक वर्मा का स्थानांतरण हो गया। नये सीआरओ हरिशंकर आ गए। एसएलओ दफ्तर के लिपिक ने भुगतान के लिए दबाव बनाया तो उन्होंने पहले मकान का निरीक्षण करने को कहा। देखने के बाद उन्हें कुछ शंका हुई। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन से फिर से आंकलन कराया। इस आंकलन में सामने आया कि मकान के दूसरे तल के सिर्फ दो कमरे ही टूटने है। इसका मुआवजा लगभग सात लाख ही था। मुआवजे की धनराशि कम होने पर मकान स्वामी ने इसे लेने और मकान में संशोधन करने से इंकार कर दिया। इसके उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ले ली। कमिश्नर के यहां भी शिकायत की गई।
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200 मीटर दूर टूटा पूरा मकान, 25 मीटर पर सिर्फ पांच फिट संशोधन
कमिश्नर के यहां की गई शिकायत में कहा गया कि एसएलओ विभाग ने जिन तीन मकानों को पूरी तरीके से तोड़ एक करोड़ के आसपास भुगतान किया वो हवाई पट्टी से 200 मीटर के आसपास से दूर हैं। वहीं, मेरा मकान हवाई पट्टी से 25 मीटर की दूरी पर है। इसमें सिर्फ पांच फिट का संशोधन बता सिर्फ सात लाख का मुआवजा दिया जा रहा है। उनकी इसी शिकायत पर पेंच फंस गया और कमिश्नर ने एडिशनल कमिश्नर अनिल कुमार मिश्र को जांच सौंप दी।
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बिना एक्सईएन के हस्ताक्षर कर दिया मूल्यांकन
प्रकरण में पीडब्ल्यूडी के एक जेई और एई की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जिन मकानों का भुगतान किया जा चुका है उनका मूल्यांकन इन्हीं की ओर से किया गया। मजे की बात ये है कि बिना एक्सईएन के हस्ताक्षर के ही मूल्यांकन की फाइल इन लोगों ने एसएलओ दफ्तर को सौंप दी। जिस पर मकानों का भुगतान किया गया। इसके साथ ही तत्कालीन सीआरओ आलोक वर्मा को भी प्रकरण के लिए दोषी पाया गया है। वर्तमान सीआरओ हरिशंकर को भी आंशिक रूप से दोषी बताया गया है।
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हवाई पट्टी के पास मकानों को तोड़ने में अनियमित भुगतान के मामले में जांच पूरी कर ली गई है। प्रकरण में तत्कालीन सीआरओ, पीडब्ल्यूडी के जेई और एई, विभाग के लिपिक को पूर्ण रूप से दोषी पाया गया है। इसके साथ ही वर्तमान सीआरओ भी आंशिक रूप से दोषी मिले हैं। सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
वीवी पंत, कमिश्नर