ठेकमा ब्लॉक के बीकापुर गांव स्थित सरकारी विद्यालय तक जाने का नहीं है रास्ता। संवाद
सरकारी धन से वर्ष 2004 में जूनियर विद्यालय का भवन तो बना दिया गया, लेकिन 22 साल बाद भी बच्चों के लिए विद्यालय तक पहुंचने की पक्की राह नहीं बन सकी।
ठेकमा ब्लॉक के बीकापुर गांव स्थित विद्यालय तक मुख्य सड़क से करीब 200 मीटर कच्ची पगडंडी है। बरसात में यह रास्ता पानी में डूब जाता है। ऐसे में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जलभराव के बीच से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन निर्माण पर सरकारी धन खर्च हुआ, लेकिन बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आज तक व्यवस्था नहीं की गई। विद्यालय के शिक्षक साहब लाल ने बताया कि बारिश शुरू होते ही विद्यालय तक पहुंचना काफी कठिन हो जाता है।
रास्ते में पानी भरने से बच्चों को परेशानी होती है। अभिभावक भी रास्ते की स्थिति को देखते हुए बच्चों को स्कूल भेजने में संकोच करते हैं। इसका असर विद्यालय की छात्रसंख्या पर भी पड़ रहा है।
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मुआवजा नहीं मिला तो खेत में मिला दी रास्ते की जमीन
पूर्व प्रधान नीरज राय ने बताया कि विद्यालय निर्माण के समय सरकारी रास्ता उपलब्ध नहीं था। ग्रामीणों की सहमति से निजी जमीन से होकर विद्यालय तक रास्ता बनाया गया था। संबंधित जमीन के मुआवजे की बात हुई थी, लेकिन मुआवजा नहीं मिलने के बाद जमीन मालिकों ने रास्ते की जमीन को अपने खेत में मिला लिया। इसके बाद विद्यालय तक स्थायी रास्ते का मामला अधर में लटक गया। ग्रामीण शिवकुमार राम ने कहा कि भवन बनने के 22 साल बाद भी बच्चे पगडंडी के सहारे स्कूल पहुंच रहे हैं।
वर्जन
मामले की जानकारी लेकर विद्यालय तक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -विमल तिवारी, खंड शिक्षा अधिकारी