लाटघाट। सरयू की बाढ़ का दंश अभी किसान भूले भी नहीं थे कि अब जमीन लीलना नदी ने शुरू कर दिया है। सहबदिया में बाढ़ से करीब 50 बीघा में बोई गई परवल की फसल बर्बाद हो गई, अब जमीन कटकर नदी में समाहित हो रही है। एक बार फिर प्रतिघंटा एक सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी से देवारावासियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
सरयू की कटान हाजीपुर गोला पुल से पूरब तरफ करीब एक किलोमीटर के दायरे में हो रही है। देवारा खास राजा के रमाकांत, रूप नारायण, बृजभान, मुनीलाल, रामलवट, बिनोद आदि की जमीन लगातार कटती जा रही है। वहीं सहबदिया गांव व बरामदपुर गांव के सामने ओम प्रकाश, जवाहर, देवेंद्र, कृष्णा, बहादुर, श्रीराम पटेल, जय सिंह पटेल, छांगुर पटेल, पुल्लू पटेल, अरविंद पटेल की जमीन भी लगातार कटती जा रही है। इनकी पहले ही बाढ़ के चलते परवल की फसल बर्बाद हो चुकी है।
नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में एक बार फिर बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर के कारण किसानों में कटान का भय भी बना हुआ है। महुला-गढ़वल बांध के उत्तर बैरहवा गांव में किसानों की सब्जी की फसल भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि पहले ही लगातार जलस्तर में उतार-चढ़ाव से परेशानी थी, अब फसलें पानी में डूबने से आर्थिक नुकसान बढ़ गया है। निबियहवा ढाला के पास रामरतन सहित अन्य किसानों की बाजरा की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई। पानी में डूबने के बाद फसल सूख गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
बदरहुआ पर 19 तो डिघिया पर 24 सेमी बढ़ा पानी
लाटघाट। सरयू नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बदरहुआ और डिघिया नालों पर रविवार को जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। शनिवार शाम चार बजे के मुकाबले रविवार को दोनों नालों के जलस्तर में वृद्धि हुई। बदरहुआ नाले पर शनिवार शाम चार बजे जलस्तर 70.78 मीटर था, जो रविवार को 19 सेंटीमीटर बढ़कर 70.97 मीटर हो गया। इसी तरह डिघिया नाले पर 70.04 मीटर था, जो 24 सेंटीमीटर बढ़कर 70.28 मीटर पहुंच गया। डिघिया नाले का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर निर्धारित है। वहीं, बदरहुआ नाले का न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ और कटान की आशंका फिर बढ़ने लगी है। हालांकि, डिघिया नाले का जलस्तर अभी खतरा बिंदु से 12 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि बदरहुआ नाला खतरा बिंदु से 71 सेंटीमीटर नीचे है।
संपर्क मार्गों पर कमर तक पानी, बढ़ी आमजन की परेशानी
महाराजगंज। क्षेत्र का महाजी देवारा, गंगापुर पुरैनिया, तिवारीपुर, जजमनजोत, कुडई, शंकरपुर, हथियागढ़ आदि गांवों की करीब 15 हजार की आबादी अभी बाढ़ के पानी से होकर आने-जाने को विवश है।
गांवों के आसपास तालाब, पोखरे और निचले खेतों में अब भी पानी जमा है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक दवा का छिड़काव नहीं कराया गया। पानी कम होने के बाद सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ गया है। खेतों में बाजरा पानी में डूबकर सड़ रहा है, जो पशुओं के खाने लायक नहीं बचा है। भूसा भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इससे पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ का पानी अभी भी चकरोड और संपर्क मार्गों पर बह रहा है। ग्रामीणों को घुटने भर पानी में पैदल आवागमन करना पड़ रहा है। जहां पानी कमर से ऊपर है, वहां नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। जमुनिहवा, आराजी मलह पुरवा, महाजी और कुढ़ई गांव के संपर्क मार्गों पर अब भी पानी जमा है। महाजी के ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं, जबकि मलहपुरवा के लोग पानी में पैदल चलकर आने-जाने को मजबूर हैं। जमुनिहवा के आदित्य, भैरव, आनंद और दीपक ने बताया कि उनका स्कूल करीब चार किलोमीटर दूर है।
प्रशासन हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नदी में पानी बहुत नीचे है। धीरे-धीरे बढ़ाव हो रहा है। कटान वाली जगहों पर परखूपाइन नदी में बैठ गई है, जिससे काफी हद तक कटान पर लगाम लगी है। वीरेंद्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड।