शिक्षा से ही समाज का सुधार हो सकता है। समाज की दशा और दिशा दोनों इसी से तय होती है। यही एक ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता है। इसे जितना बांटो यह उतनी बढ़ती है। यह कहना है वर्ष 2015 के राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित पूर्व माध्यमिक विद्यालय महराजगंज के प्रधानाध्यापक उदयराज यादव का। वे इस सम्मान का सारा श्रेय अपने गुरु एनडी पाठक को देते हुए कहते हैं कि अध्ययन के दौरान उन्होंने हमें जो रास्ता दिखाया था हम उसी पर चलने का प्रयास आज कर रहे हैं।
उदयराज की प्राथमिक शिक्षा कौड़िया में हुई थी। कोयलसा के उद्योग इंटर कालेज से हाईस्कूल और इंटर करने के बाद उन्होंने शिवाजी पीजी कालेज से स्नातक फिर मऊ से बीटीसी किया। इनकी प्रथम नियुक्ति अंबेडकर नगर जिले के प्राथमिक विद्यालय नरियांव में हुई। 1983 में इनका स्थानांतरण प्राथमिक विद्यालय कौड़िया में हो गया। जहां 23 वर्षों तक अध्यापन के बाद फरवरी 2010 में इन्हें पदोन्नति देकर प्राथमिक विद्यालय धनधारी में प्रधानाध्यापक बना दिया गया। वर्तमान में आप पूर्व माध्यमिक विद्यालय महराजगंज में कार्यरत हैं।
इतने वर्षों से अध्यापन के बाद भी उदयराज जी के उत्साह में अभी भी कोई कमी नहीं है। आज भी वह समय पर विद्यालय पहुंचते है और बच्चों को नैतिक शिक्षा के साथ ही अनुशासन का भी पाठ पढ़ाते हैं। उनके इन्हीं गुणों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्होंने बताया कि हम एक नारे ‘यूपी हो या राजस्थान, शिक्षा होगी एक समान’ को मन में बिठाकर बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करते हैं।
अमर उजाला के बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ अभियान को बेहद प्रेरणास्पद बताते हुए कहते हैं इसी से प्रेरित हो कर मैने अपनी बेटियों को भी उच्च शिक्षित बनाया है। चार बेटियों में सबसे बड़ी बेटी मनीषा यादव पीएचडी कर चुकी है। दूसरी बेटी वंदना और तीसरी बेटी चेतना दोनों एमए, बीएड कर चुकी है, चौथी प्रिया यादव वाराणसी से डेंटल में डिप्लोमा कर रही है। एकमात्र पुत्र प्रशांत यादव गांधी स्मारक पीजी कालेज कोयलसा से एमए कर रहा है।