आजमगढ़। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि पर फैसला कभी भी आ सकता है। फैसला आने के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने और नियंत्रित करने के लिए शासन की ओर से सभी प्रयास किए जा रहे हैं। स्थिति कंट्रोल में रहे इसके लिए जहां गांव स्तर पर लोगों को समझाया और बवाली लोगों को पाबंद आदि किया जा रहा है वहीं, आईबी और खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार थाना क्षेत्रों को ए, बी और सी कैटेगरी में बांटा गया है। इसके लिए थाना प्रभारियों और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं। गांवों में बैठकों के साथ-साथ थानों पर फोर्स भी बढ़ा दी गई है।
अयोध्या विवाद पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शासन की ओर से पुलिस और प्रशासन को हाई अलर्ट कर दिया गया है। आजमगढ़ वैसे ही संवेदनशील जनपदों की श्रेणी है। शासन के निर्देश पर मुहल्ला और ग्राम सुरक्षा समितियों को सक्रिय बनाया जा रहा है। मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों पर पुलिस की पैनी नजर है। शहर और कस्बों के संवेदनशील मुहल्लों और गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। पिछले पांच सालों के खुराफाती पुलिस की डायरी में हैं। खुफिया विभाग भी संदिग्धों पर नजर रख रहा है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर शासन से जनपद के थानों की ए, बी, सी तीन श्रेणी में बांटा गया है। ए श्रेणी में उन थाना और कोतवाली को रखा गया है जहां पूर्व में दंगे हो चुके हैं। यहां के लिए अति विशेष सर्तकता रखने के निर्देश दिए गए हैं। बी श्रेणी में ऐसे थानों को रखा गया है जहां दंगा जैसी कम घटनाएं हुई है। सी श्रेणी में मिश्रित आबादी वाले थाना क्षेत्र रखे गए हैं।
ए श्रेणी वाले थाना क्षेत्र : सरायमीर, बिलरियागंज, मुबारकपुर, फूलपुर, दीदारगंज, मुहम्मदपुर।
बी श्रेणी वाले थाना क्षेत्र : शहर कोतवाली, देवगांव, जीयनपुर, रानी की सराय, मुड़ियार, गंभीरपुर।
सी श्रेणी वाले थाना क्षेत्र : तरवां, कंधरापुर, कप्तानगंज।
थानों के साथ चर्चित लोगों की भी बनी श्रेणी
संवेदनशीलता के आधार पर थानों को कैटेगरी में बांटने के साथ ही जनपद के चिर्चित हिंदूवादी और मुस्लिम नेताओं को भी तीन श्रेणी में बांटा गया है। अपनी पूर्व की गतिशीलता के आधार पर ही ये नेता भी विभिन्न श्रणियों में विभाजित हैं। इसके आधार पर पुलिस को इन पर नजर रखनी है। गतिविधियों को देखते हुए फैसला आने से पूर्व इनको पाबंद, नजरबंद या फिर गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। आईबी और खुफिया विभाग की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर ए श्रेणी में राष्ट्रीय उलमा काउंसिल के सुप्रीमो आमिर रशादी, मसीहुद्दीन संजरी, राष्ट्रीय उलमा काउंसिल के नुरुल हुदा को रखा गया है। बी श्रेणी में हिंदूवादी नेता गौरव रघुवंशी, राष्ट्रीय उलमा काउंसिल के तलहा रशादी, अब्दुल कलाम और सी श्रेणी में आतिफ और भुंवर शामिल हैं। इनको लेकर भी पुलिस की ओर से रणनीति बनाई जा रही है। फैसला आने पर कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थिति से निपटने के लिए बनाई गई रणनीति
अयोध्या पर फैसला आने के बाद स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पिछले दिनों आंतरिक सुरक्षा समिति की मीटिंग में रणनीति बनाई गई। एसपी की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में एसडीएम, सीओ और बीडीओ को तहसील, ब्लाक और थाने स्तर फील्ड स्टाफ की मीटिंग कर स्थिति की संवेदनशीलता बताने का निर्देश दिया गया। तहसील और ब्लाक स्तर पर लेखपालों, ग्राम विकास अधिकारियों, प्रभारी चिकित्साधिकारियों के साथ आशा, बीडीओ के साथ सफाईकर्मियों, रोजगार सेवकों, पूर्ति निरीक्षकों के साथ कोटेदारों, बीईओ के साथ शिक्षकों की बैठक कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी धार्मिक व सामाजिक संगठनों के प्रमुख जैसे, जमात-ए इस्लामी, विहिप, बजरंग दल, उलेमा काउंसिल की भी बैठक कर उन्हें समझाने के निर्देश दिए गए हैं। अपने-अपने क्षेत्र के संवेदनशील स्थलों, गांव, मजरों की सूची तैयार करने, माफिया, गुंडा और असामाजिक तत्वों को चिह्नित कर निरोधात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है। पिछले पांच सालों में जिनके नाम खुराफात करने में आए हैं, उन्हें पाबंद करने की कार्रवाई की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया है। अफसरों ने छोटी-छोटी शिकायतों को गंभीरता से लेकर उनका समाधान करने की हिदायत दी है। एहतियातन थानों में मोर्चे बनाए जा रहे हैं। पैरामिलिट्री फोर्स के साथ पुलिस मिश्रित आबादी क्षेत्रों में गश्त कर रही है।
अयोध्या के संबंध में आने वाले फैसले को लेकर पुलिस-प्रशासन की ओ से शासन से मिले निर्देश के क्रम में सबी तैयारी की जा रही है। सभी की छुट्टियां रद कर दी गई हैं। गांव-गांव बैठक कर लोगों को समझाया जा रहा है। पुलिस पूरी तरीके से अलर्ट हैं। - त्रिवेणी सिंह, एसपी