आजमगढ़। सभी जानते हैं जल ही जीव है। ऐसे में इस स्वच्छ होना अत्यंत जरूरी है। जिले के पेयजल स्वच्छता मिशन के अधिकारियों की माने तो यहां के पानी में कोई खराबी नहीं हैं। लेकिन वहीं, जिला अस्पताल के ही आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलेगा कि जिला अस्पताल आने वाले रोजाना के मरीजों में लगभग 500 ऐसे होते हैं, जो दूषित पानी के शिकार होते हैं। 2017 में पानी जांच के लिए आई किट अधिकारियों और कर्मचारियों की शिथिलिता के कारण वो जल निगम के कार्यालय में धूल फांक रही हैं।
आसपास के जिले के पानी में आर्सेनिक और अन्य हानिकारक तत्व मिलते रहते हैं। वहीं, पेयजल स्वच्छता मिशन विभाग की माने तो जिले में आर्सेनिक जैसे हानिकारक तत्वों का कोई प्रभाव नहीं है और जिले का पानी एकदम शुद्ध है। कहीं से कोई शिकायत नहीं मिल रही है। कुछ स्थानों पर गंदगी के कारण थोड़ी परेशानी है तो उन्हें जागरूक का पानी स्वच्छ रखने के बारे में बता दिया जाता है। वहीं, जिला अस्पताल के सीएमएस की बातों पर यकीं करें तो अस्पताल में रोजाना लगभग 14 सौ से 15 सौ लोगों की ओपीडी होती है। इसमें लगभग 500 मरीज ऐसे होते हैं तो दूषित पानी की वजह से पीलिया, एनीमिया और उल्टी-दस्त की चपेट में रहते हैं।
पेयजल स्वच्छता मिशन को अपने आंकड़ों पर इतना यकीं है कि पिछले दो साल से जिले में पानी की जांच भी नहीं की गई है। 2015 में विभाग की ओर से सरकारी नलों और टंकियों के पानी की सैंपलिंग और जांच कराई गई थी। जिले के कुल 22 ब्लाकों में मात्र तीन के पानी में खामियां मिली थीं। यहां हार्डनेस, आयरन और नाइट्रेट की मात्रा अधिक मिली थी। वर्ष 2016 में जहां पानी की कोई जांच ही नहीं की गई, वहीं 2017 के लिए एक माह से आई किटें जल निगम में धूल फांक रही हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो ब्लाक अधिकारियों से किट उठाने के लिए कई बार कहा गया, लेकिन ऊधर से ही कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। उन्हें रिमाइंडर दिया जा रहा है।
पिछली बार कि ट आई नहीं, इस बार उठाई नहींः आजमगढ़। पेयजल स्वच्छता विभाग के समन्वयक और एमआईएस संतोष कुमार दुबे ने बताया कि साल में तीन बार पानी का जांच होनी चाहिए। एक बार बरसात से पहले और एक बार बरसात के बाद। इसके अलावा एक बार गर्मी के मौसम में भी जांच की जानी चाहिए। बरसात से पहले की जांच के लिए 80 हजार किट आई है, जिसे जांच के लिए ब्लाक अधिकारियों की ओर से नहीं उठाया जा रहा है। पिछले वर्ष की जांच के बारे में उन्होंने बताया कि शासन से ही किट नहीं आने के कारण जांच नहीं हो सकी। बरसात से पहले की जांच अब नहीं होने के बारे में उनसे पूछताछ की गई तो कोई जवाब नहीं दे सके।
एनजीओ की जांच में अधिक मिली थी फ्लोराइडः आजमगढ़। वर्ष 2016 में किट एक्सपायर होने के कारण विभाग की ओर से तो कोई जांच नहीं की, लेकिन विंग्स संस्था की ओर से विभिन्न ब्लाकों के पानी की जांच की गई थी। इसमें अतरौलिया, मार्टीनगंज और अहरौला ब्लाक के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई थी।
नाइट्रेट, आयरन और फ्लोराइड की अधिकता से नुकसानः आजमगढ़। 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नाइट्रेट स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक माना जाता है। पानी में 0.1 से कम व 1.0 से अधिक आयरन भी नुकसानदेह होता है। पानी में नाइट्रेट की अधिकता वयस्कों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन बच्चों के शरीर पर नीले चकत्ते पड़ जाते हैं और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। पानी में आयरन की अधिक मात्रा से पथरी हो जाती है। वहीं पानी में फ्लोराइड अधिक होने से हड्डियां टेढ़ी हो जाती हैं। जानकारों का कहना है कि इस तरह के पानी का सेवन करने से बचना चाहिए। दूषित पानी से उल्टी-दस्त, पीलिया और एनीमिया भी लोगों को अपनी चपेट में लेता है।
महाराजगंज के देवारा में हुई थी फ्लोराइड की शिकायतः आजमगढ़। पेयजल स्वच्छता मिशन के सलाहकार लालचंद यादव ने बताया कि महाराजगंज के देवारा क्षेत्र में आर्सेनिक की शिकायत हुई थी। इसके बाद जलनिगम की ओर से वहां के पानी जांच कराई गई थी, लेकिन रिपोर्ट में कहीं भी आर्सेनिक नहीं मिला था।