बलरामपुर। जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भी अधिक ठंड पड़ने से चर्म रोग के मरीजों की संख्या आम दिनों की तुलना में करीब दोगुनी बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में इस समय 110 से 120 मरीज आ रहे हैं। जहां अन्य दिनों में रोजाना 20 से 25 चर्मरोग के मरीज ही आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़ कर 40 से 45 मरीज हो गई है। इसके अलावा निजी क्लीनिक में भी चर्म रोगी पहुंच रहे हैं।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ़ पूनम कुमारी ने बताया कि जिला अस्पताल के चर्म रोग विभाग में फिलहाल जो लोग आ रहे हैं, उनमें एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, एक्जिमा, आर्टिकेरिया, सोरायसिस, स्कैबिज के मरीज शामिल हैं। जांच कर उन्हें दवा लिखी जाती है। दवा को नियमित खाने से बीमारी ठीक होती है। समय पर उपचार नहीं कराने पर चर्म रोग तेजी से बढ़ रहा है। चूंकि त्वचा शरीर का सबसे कोमल हिस्सा होता है। शरीर के अंदरूनी हिस्से की तुलना में चमड़ी सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में रहती है। इस कारण धूप, धूल, मिट्टी, गंदगी, प्रदूषण, बाहरी वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया आदि त्वचा को प्रभावित करते हैं। त्वचा पर होने वाला संक्रमण या रोग हैं, जो त्वचा के बाहरी हिस्से पर कहीं भी हो सकते हैं। चर्म रोग की समस्या पर त्वचा में खुजली, दाने, रैशेस, लालिमा, सूजन, जलन, छाले, बाहरी हिस्से पर घाव जैसी समस्या होती है। कुछ चर्म रोग सामान्य होते हैं, जबकि कुछ बहुत गंभीर रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। डॉ पूनम ने आगे बताया कि ठीक ढंग से शरीर का ध्यान न रखने पर शरीर शुष्क हो जाती है जिससे समस्या बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि शरीर पर नारियल तेल दिन में दो बार लगाएं, हल्के गुनगुने पानी से नहाएं। शरीर को कपड़े से ढक कर धूप लें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।