रितु सुहास, विकास प्राधिकरण की सचिव
विकास प्राधिकरण को मास्टर प्लान की दरकार है, क्योंकि बरवक्त विभाग 30 वर्ष पुराने विनियमितीकरण प्लान पर काम कर रही है। इसका परिणाम है कि विभाग के साथ-साथ नगरवासी भी काफी संशय में है। बताते चले कि मास्टर प्लान लागू न होने के कारण लोग नगर क्षेत्र में जमीन खरीदने से डर रहे हैं कि कही ऐसी जमीन न खरीद ली जाए जिस पर विकास प्राधिकरण का चाबुक चल जाए।
बताते चले आजमगढ़ जिला मुख्यालय तीन तरफ से तमसा नदी से घिरा है। वर्ष 2009 में विकास प्राधिकरण की स्थापना कर आठ किमी रेडियस में आने वाले 159 गांवों को इसमें शामिल किया गया। उद्देश्य था कि समाहित किए गए गांवों को सुव्यस्थित कर नगर का सुंदरीकरण करना था। इससे तीन किमी की परिधि में सिमटे मुख्यालय का दायरा भी बढ़ेगा। लेकिन दुर्भाग्य रहा कि प्राधिकरण की स्थापना के बाद भी मास्टर प्लान नहीं तैयार हो सका।
इसी क्रम में वर्ष 2011 में प्राधिकरण में शामिल किए गए क्षेत्रों का विकास करने के लिए उसके हिसाब से नया मास्टर प्लान बनाने की संस्तुति की गई। पांच वर्ष के अंतराल में नया मास्टर प्लान नवंबर 2015 में तैयार हुआ, लेकिन उसमें खामियां मिली। इसके चलते शासन ने उसे निरस्त कर दिया। अब फिर से प्राधिकरण विनियमितिकरण क्षेत्र के 30 वर्ष पुराने प्लान पर काम कर रही है।
इससे स्पष्ट नहीं है कि नगर क्षेत्र का कौन सा हिस्सा ग्रीन लैंड, कौन से कामर्शियल, कौन से क्षेत्र फ्लड एरिया का और कितनी कृषि लैंड है। इस संशय में लोग नगर क्षेत्र के आसपास के हिस्सों में जमीन खरीदने से कतराने लगे हैं। इसका परिणाम है सबरजिस्टार सदर क्षेत्र में रजिस्ट्री कम होने लगी है। डीआईजी स्टांप शुल्क रमाकांत सिंह यादव ने इस बात को स्वीकार किया। बोले, नगर क्षेत्र में जमीन की खरीद फरोख्त में कमी आई है। साथ ही अवैध निर्माण पर भी रोक लगता।
पुराना प्लान निरस्त होने के बाद नया प्लान तैयार किया जा रहा है, जो दो माह के अंदर आ जाएगा। नए प्लान में भी ग्रीन लैंड, फ्लड एरिया और पार्क में कोई तब्दीली नहीं होगी क्योंकि इसी के चलते पुराना प्लान निरस्त किया गया है। - रितु सुहास, विकास प्राधिकरण की सचिव