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नई पीढ़ी को चेतना की जरूरत

Wed, 09 Nov 2016 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
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जलपुरुष राजेंद्र‌
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अगली पीढ़ी को स्वराज, समृद्ध चेतना की जरूरत है। जरूरत इस बात की है कि राज और समाज मिलकर नई पीढ़ी में धरती, पानी के गहरे संबंध बनाने का एहसास जगाए। इससे शिक्षकों और बच्चों में अहसास जगेगा कि स्वस्थ रहना है तो प्रकृति को स्वस्थ रखना होगा। ये बातें मैगसायसाय पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने मंगलवार को लाटघाट के मिश्रपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल में जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित 'आओ प्रकृति के साथ जीना सीखें' विषयक शैक्षणिक कार्यशाला में कहीं। इस दौरान पेंटिंग प्रतियोगिता भी हुई जिसमें बच्चों ने हिस्सा लिया। 
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जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि मैंने 11800 ड्रंप जौहर बनाकर सात नदियों को सूखने से बचाकर प्रेरित करने का काम किया है। इसके लिए बच्चों, शिक्षकों, मां और उनके पिता से संवाद करें कि जिन नदियों का पानी पीने और नहाने लायक नहीं है, उन्हें कैसे ठीक करें। आजमगढ़ को हरा-भरा रखने के साथ ही जल को सुरक्षित रखना है। जल संचयन और हरियाली होगी तो ही बारिश होगी। आजमगढ़ के ताल समृद्धि का सबसे बड़ा आधार हैं।

जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने कहा कि पानी पढ़ाई का नहीं संस्कार का विषय है। पानी की जो कल कल है, उसी से संगीत का जन्म हुआ। कार्यक्रम में काशी विद्यापीठ से डा. कमला सिंह और इलाहाबाद से अमरेंदु सिंह सहित 25 चित्रकारों का दल पहुंचा था। चित्रकारों ने नदी और वन संपदा को कैनवास पर उकेरा। मौके पर राकेश सिंह, आईएएस अरविंद चौहान, रविंद्र राय, कन्हैयालाल यादव, अरविंद जायसवाल, मनीष मिश्रा, रामाश्रय राय, हरिराम यादव, विधायक अभय नरायन पटेल, चंद्रशेखर यादव ने संबोधन किया। अध्यक्षता हवलदार यादव और संचालन राजीव रंजन राय ने किया। 
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नाटक के जरिये पर्यावरण के प्रति किया सचेत ः मिश्रपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल के परिसर में पर्यावरण संरक्षण कार्यशाला में हरियाणा से आए युवा कलाकारों ने नाटक के जरिए जल, जमीन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया। जल युवा कलाकारों ने पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया। इस दौरान पौधे भी लगाए गए। सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि राष्ट्र के सृजन यात्रा में सामाजिक समरसता पैदा करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आयोजन एक सराहनीय कदम है। 
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