कार्तिक पूर्णिमा पर दुर्वासा धाम में लगे मेले के अंतिम दिन शुक्रवार को भारी भीड़ उमड़ी। नदी में डुबकी लगाने के बाद सामानों की खरीदारी की। वहीं दूर-दराज से आए दुकानदार मोल भाव कर औने पौने दाम पर सामान बेचकर रवाना हुए।
दुर्वासा धाम के तमसा-मंजूषा के पवित्र संगम पर वैसे तो तीन दिन मेले का आयोजन होता है। लेकिन दूर-दराज से आए व्यापारी बचे सामानों को बेचने के लिए एक-दो दिन और रूक कर औने-पौने दामों में सामान बेचकर चले जाते हैं।
मेला के चौथे दिन भी आस-पास के ग्रामीण मेले में पहुंचे। पुरुषों ने जहां किसानों के हाथा, फावड़ा, कुदाल, हसिया आदि की खरीदारी की।
वहीं महिलाओं ने गृहस्थी के लिए चौका, बेलन, सिल्ह, चाकी, जाता, चिमटा के साथ श्रृंगार की खरीदारी की। चाट, फुलकी और चाउमीन की दूकानों पर भारी संख्या में महिलाओं और बच्चों की भीड़ रही।
फूलपुर इलाके में दुर्वासा धाम पर दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु अपने घरों को रवाना होने लगे।
इस दौरान खुरासन रोड, दीदारगज, सजंरपुर, सरायमीर, खंजहा हाल्ट रेलवे स्टेशन पर भीड़ रही।
शाम तक मेला मेें लगे झूला, सर्कस, मौत का कुंआ आदि को पुलिस ने बंद करा दिया।