संगोष्ठी को संबोधित करते हुए केंद्र के अध्यक्ष अमरनाथ तिवारी ने कहा कि हरिऔध जी आजमगढ़ जिले के साहित्य जगत के महान रत्न थे। अपनी अप्रतिम रचनाओं से खड़ी बोली के साहित्य को एक नया आयाम दिया। उन्होंने सन् 1925 में आजमगढ़ में हिंदी कवि-सम्मेलन का श्रीगणेश किया था। इस काम में उन्हें अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। उनकी कोशिशों का ही फल रहा कि उनकी रचनाओं का उल्लेख ब्रिटिश और अमेरिकन इंसाइक्लोपीडिया में भी किया गया। साहित्यकार डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि हरिऔध जी हिंदी साहित्य सम्मेलन में दो बार आध्यक्ष चुने गए थे।
डा. द्विजराम यादव ने कहा कि हरिऔध जी न केवल कवि थे, बल्कि एक अच्छे गद्यकार भी थे। कार्यक्रम का समापन आरडी यादव, विजेंद्र प्रताप श्रीवास्तव, विनम्रसेन सिंह, आशा सिंह, मयकश ‘आजमी’ डंक जी ने कविता पाठ से किया। डा. श्रीनाथ सहाय ने आभार जताया। इस मौके पर पद्मनाथ श्रीवास्तव एडवोकेट, डा. कौशलेंद्र मिश्र, हरिहर प्रसाद पाठक, निशीथ रंजन तिवारी, जनमेजय पाठक, राहुल सिंह, संतोष कुमार, श्रीमती फिरदौस जहां, प्रभाति तिवारी उपस्थित थे।