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Azamgarh News: वेंटिलेटर पर जिले का ट्रॉमा सेंटर

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23 जिला अस्पताल का ट्रामा सेंटर। संवाद - फोटो : कार्यक्रम के दौरान मौजूद जिला जज व बैंक अ​धिकारी।
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- बेहतर स्वास्थ्य सुविधा न होने से आए दिन मरीजों को हायर सेंटर किया जाता है रेफर
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- एक भी वेंटिलेटर नहीं होने से जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होते हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। जिला अस्पताल में करोड़ों की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर खुद वेंटिलेटर पर है। यह केंद्र केवल मरीजों का रेफरल सेंटर बनकर ही रह गया है। यहां पर मुकम्मल सुविधाएं नहीं होने से केवल हड्डी रोगियों का ऑपरेशन होता है। यहां अभी तक हादसों के गंभीर मरीज यहां सीधे भर्ती नहीं होते। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को ही यहां भेजा जाता है। ट्रॉमा सेंटर बनने आठ साल बाद तक यहां वेंटिलेटर की सुविधा नहीं हो पाई है।
आजमगढ़ से सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, मऊ, गोरखपुर, जौनपुर, गाजीपुर और वाराणसी जाने के लिए हाईवे और लखनऊ के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जैसे मार्गों से घिरे जिले में प्रतिदिन हादसे होते रहते हैं। इसके बावजूद जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर न होने से गंभीर घायल मरीजों को वाराणसी व लखनऊ रेफर करना पड़ता है। यहां जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनने के आठ साल बाद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंभीर घायलों और बीमारों को वाराणसी ट्रॉमा सेंटर या पीजीआई लखनऊ रेफर करना मजबूरी है। वर्ष 2015 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर की सुविधा देने की घोषणा की थी। सरकार ने तत्काल 1.17 करोड़ की धनराशि भी उपलब्ध करा दी। पिछली सरकार में आजमगढ़ जिला प्रदेश सरकार के रडार पर होने के चलते काम भी तेजी से हुआ। अप्रैल 2016 में आधी अधूरी तैयारी के बीच ट्रॉमा सेंटर का लोकार्पण भी हो गया, लेकिन डॉक्टरों की तैनाती न होने से जिले की करीब 54 लाख की आबादी को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। ट्रॉमा सेंटर में आज तक एक भी वेंटिलेटर नहीं लगाया जा सका है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया जाता है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से मरीजों को यहां से हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गया है।
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ट्रॉमा सेंटर में केवल दो चिकित्सक तैनात
ट्रॉमा सेंटर में 50 पद सृजित हैं। इसमें 39 पद पर कर्मचारी कार्यरत हैं। ट्रॉमा सेंटर में दो चिकित्सक डॉ. बीके श्रीवास्तव व डॉ. पीबी प्रसाद कार्यरत हैं। सेंटर में सुबह के टाइम चार नर्स ड्यूटी करती हैं। दोपहर में एक व नाइट में दो स्टाफ नर्स की ड्यूटी रहती है। तीनों शिफ्टों में तीन वार्ड बॉय व सफाईकर्मी रहते हैं। यहां चिकित्सकीय संसाधन से लेकर उपकरणों का अभाव है।
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आज तक नहीं मिल पाईं जरूरी सुविधाएं
मंडलीय जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में पर्याप्त दवाएं, सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, विशेषज्ञ डॉक्टर, वर्किंग ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट, ट्रांसपोर्टेबल वेंटिलेटर, सीटी स्कैन, ब्लड स्टोरेज यूनिट, पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन, पैथोलॉजी, ईको कार्डियोग्राॅफी, ईसीजी और स्पाइन बोर्ड जैसी सुविधाएं होना जरूरी हैं। इसमें न्यूरो सर्जरी, एक्सरे, सिटी स्कैन, ब्लड स्टोरेज यूनिट, पैथोलॉजी आदि व्यवस्थाएं आज तक मुहैया नहीं हो पाईं।
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ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो सर्जन के नहीं होने के चलते न्यूरो के मरीजों को रेफर किया जाता है। शासन से यहां चिकित्सकों सहित अन्य सुविधाओं की मांग की गई है।- डॉ. सतीश चंद्र कन्नौजिया, एसआईसी मंडलीय जिला अस्पताल।
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