शहर के मुख्य चौक पर जर्जर भवन।- प्लान खबर की फोटो
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। हर पल हादसे की आशंका। पता नहीं कब कौनसी इमारत गिरकर किसी की जान ले ले। न तो जिम्मेदारों को परवाह और न ही इमारत के रखवालों को। निजी भवन ही जर्जर नहीं हैं बल्कि ऐसी इमारतों में सरकारी दफ्तर भी चल रहे हैं। इसके बावजूद नगर पालिका ने जर्जर इमारतों को गिराने का प्रयास नहीं किया।
गाजियाबाद के मुरादनगर में अंत्येष्टि स्थल की गैलरी छत सहित गिरने से 24 लोगों की मौत से भी स्थानीय प्रशासन ने सबब नहीं लिया। हाल ही में बारिश में कई मकानों की दीवारें तक गिर चुकी हैं और लोग घायल हुए हैं। इन सब के बावजूद भी अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि निर्देश के बाद भी नगर पालिका के पास जर्जर भवनों की सूची नहीं उपलब्ध है। कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में पड़ कर रह गई। पुरानी कोतवाली, दलालघाट मोड़, आसिफगंज व मुख्य चौक के पास जर्जर भवन हैं। आएदिन उक्त जर्जर भवनों से मलबा टूटकर गिरता रहता है। यहां लोगों को बारिश के दिनों में तो हादसा होने का खासा डर बना रहता है। पिछले साल भी बारिश के दौरान जिला प्रशासन ने संबंधित भवन स्वामियों को इन भवनों को ढहाने के निर्देश दिए थे।
शहर में जर्जर भवनों को पहले चिह्नित किया गया होगा तो उसके हिसाब से कार्यवाही की जाएगी। यदि पहले से उनकी सूची नहीं तैयार है तो जल्द ही सूची बनवाई जाएगी। नगर पालिका की जिम्मेदारी अभी मुझे मिली है और संयोग से अब पालिका में अवर अभियंता भी आ गए हैं। ऐसे में जर्जर भवनों को ध्वस्त कराना संभव हो पाएगा।-वागीश शुक्ला, एसडीएम सदर एवं प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका