निजामाबाद के भैरवपुर कला ग्रामसभा में मां शीतला के दरबार में चल रहा रंगाई-पुताई का कार्य।
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आजमगढ़। दो दिन में नवरात्र शुरू होने वाले हैं। नवरात्र को लेकर मंदिरों को सजाने-संवारने के साथ ही नवरात्र पर स्थापित की जाने वाली देवी प्रतिमा की भी तैयारी जोरशोर से जारी है। कोविड-19 को लेकर सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन को लेकर ही प्रतिमाओं की स्थापना और पूजा-पाठ की तैयारी की जा रही है। प्रतिमाओं के साथ ही पंडालों का आकार छोटा रखने के साथ ही थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेश की व्यवस्था की जा रही है। इन सबके बीच प्रमुख देवी मंदिरों और पूजा पंडालों तक श्रद्धाओं को इस साल भी कंकड़ों और सड़कों पर पड़े गड्ढों से होकर ही गुजरना पड़ेगा। हालांकि शासन की ओर से देवी मंदिर, पूजा पंडाल और विसर्जन वाले रास्तों पर पड़े गड्ढों को 72 घंटे के भीतर भरने और मार्ग को सही करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इस पर विभाग कहां तक सही उतरता है ये देखने वाली बात होगी।
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गड्ढों और जलभराव के बीच होगा दरबार तक का सफर
जहानागंज। ब्लाक के टाड़ी स्थित माता परमज्योति धाम पर नवरात्र में अच्छी खासी भीड़ होती है। काफी संख्या श्रद्धालु यहां शीष नवाने पहुंचते हैं। माता के दरबार पहुंचने वाले रास्ते की हालत काफी खराब है। गड्ढों और गन्दे पानी से होकर श्रृद्धालुओं को माता के दरबार में हाजिरी लगानी होगी। टाड़ी बाजार से मंदिर तक रास्ते की हालत इतनी खराब है कि नाली का पानी हमेशा सड़क पर बहता रहता है। शासन की ओर से 72 घंटे में ऐसे रास्तों को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
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नवरात्र में माता परमज्योति धाम पर जाने का रास्ते पर हमेशा नाली का गन्दा पानी लगा रहता है। इससे लोगों को आने जाने में परेशानी होती है। नवरात्र के प्रथम दिन हजारों की भीड़ लगती है। इस बार सभी श्रद्धालु को मास्क पहनकर ही मन्दिर में प्रवेश मिलेगा।
रामानंद बरनवाल
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गांव में परमज्योति धाम स्थित है। यहां काफी संख्या में लोग आते जाते हैं। प्रधान से कई बार कहने के बाद भी निदान नहीं हुआ। गन्दा पानी सडक पर लगा रहता है। इससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। गंदे पानी से होकर ही मंदारि जाना पड़ेगा।
दीपक मौर्य
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कहीं भक्तों का गुस्सा न झेले प्रशासन
आजमगढ़। शहर में तकिया से मुकेरीगंज तक लगभग आधा किमी, हर्रा की चुंगी से मोहल्ला कोट तक एक किमी, पुरानी कोतवाली-दलालघाट तक लगभग आधा किमी, जामा मस्जिद से पुरानी सब्जी मंडी होते हुए शंकरजी तिराहे तक 1.5 किमी तक सड़की की भी यहीं दशा है। सड़कों पर पड़े गड्ढों के कारण श्रद्धालुओं को यहां भी मुसीबत उठानी पड़ेगी। क्योंकि इन मार्गों पर भी प्रतिमाओं की भरमार होती है। श्रद्धालुओं को इन्हीं मार्गों से होकर ही आना-जाना होगा। जिलाधिकारी की ओर से पीडब्ल्यूडी और नगर पालिका को कई बार गड्ढामुक्ति के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। समय पूरा होने के है, लेकिन दोनों ही संस्थाओं की ओर से अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।