आजमगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षकों की कोशिशों को निदेशालय ने एक किताब की शक्ल दी है, नाम है-उम्मीद के रंग। 20 जिलों के 24 शिक्षकों ने शिक्षा में बदलाव और बेहतरी की दास्तान लिखकर कैसे स्कूलों की तस्वीर बदल दी पर आधारित है।
बेसिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश भर के बेहतर काम करने वाल बीस जिलों के 24 शिक्षकों के प्रयासों का चयन किया है। इन शिक्षकों में आजमगढ़ जिले के ठेकमा ब्लॉक के शिक्षक सदाशिव तिवारी भी हैं। इन सभी के प्रयासों एक किताब का रूप दिया गया है। आठ अक्टूबर को निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने लखनऊ में इसका लोकार्पण किया है। इंग्लिश मीडिएम प्राथमिक विद्यालय जिवली के शिक्षक सदाशिव तिवारी ने स्कूल ही नहीं, इलाके में रहने वालों का भी मनोदशा बदल दी है। बोलचाल की भाषा संग उनके अंदर ज्ञान ज्योति जला रहे हैं। आज उनकी कक्षा के बच्चे निर्भय होकर मन लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनके स्कूल में वह सब कुछ है, जो आमतौर पर निजी स्कूल में भी नहीं होता। उन्होंने लिखा है कि कैसे उन्होंने बच्चों की मनोदशा बदलकर उन्हें पढ़ाई की ओर अग्रसर किया है। उनकी कोशिशें देखकर गांव वालों का मन भी बदला और बच्चों का पढ़ने में मन लगा। जिले के अलावा इस किताब में खीरी, हरदोई, फतेहपुर, मेरठ, गोंडा, कुशीनगर, गाजियाबाद, अलीगढ़, बलरामपुर, उन्नाव, प्रयागराज, प्रतापगढ़, ललितपुर, जौनपुर, कानपुर नगर, सोनभद्र, बस्ती, मऊ शामिल हैं।
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मैंने तो अपने स्कूल की कहानी लिखी है कि कैसे कक्षा अवलोकन कर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाए। बेशिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से कहानियां मांगी थीं, जिनको एक किताब में बदल दिया गया है। इससे हम लोगों को प्रेरणा मिलती है और बेहतर काम करने का हौसला आता है।
- सदाशिव तिवारी, सहायक अध्यापक, इंग्लिशमीडिएम प्राथमिक विद्यालय जिवली।
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उम्मीद के रंग का उद्देश्य शिक्षकों को प्रेरित करना है। बहुत से शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा की दिशा में शानदार प्रयास किए हैं, जिनकों उन्हीं के शब्दों में लिखवाकर किताब का रूप दे दिया गया है। टाटा ट्रस्ट ने इस काम में विभाग का सहयोग किया है। यह किताब हर शिक्षक को दे दिया गया है।
अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।